खाना बनाते समय या खाना खाते वक्त कपड़ों पर तेल गिर जाना आम बात है। परेशानी तब बढ़ जाती है, जब तेल का दाग तुरंत साफ नहीं किया जाता। तेल कपड़े के रेशों में अच्छी तरह चिपक जाता है और बाद में इसे हटाना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, अगर दाग ताजा है तो घर में मौजूद कुछ चीजों की मदद से इसे साफ करने की कोशिश की जा सकती है। इसके लिए टिश्यू, बेकिंग सोडा, कॉर्नस्टार्च, टैल्कम पाउडर और डिशवॉश लिक्विड काम आ सकते हैं।
सबसे पहले टिश्यू से तेल सोखें
अगर कपड़े पर अभी-अभी तेल गिरा है तो सबसे पहले उसे रगड़ने से बचें। रगड़ने से तेल और ज्यादा फैल सकता है और कपड़े के दूसरे हिस्से में भी लग सकता है।
एक साफ टिश्यू या पेपर टॉवल लें और उसे दाग वाली जगह पर हल्के हाथ से दबाएं। इससे कपड़े में मौजूद अतिरिक्त तेल सोखने में मदद मिलेगी।
ध्यान रखें कि टिश्यू को दाग पर घिसना नहीं है।
बेकिंग सोडा से सोखें तेल
तेल सोखने के लिए दाग वाली जगह पर थोड़ा बेकिंग सोडा डाल सकते हैं। इसे कुछ मिनट तक कपड़े पर लगा रहने दें, ताकि यह तेल को सोख सके।
इसके बाद पाउडर को हल्के हाथ से हटा दें।
अगर घर में बेकिंग सोडा नहीं है तो कॉर्नस्टार्च या टैल्कम पाउडर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
डिशवॉश लिक्विड आएगा काम
तेल और चिकनाई हटाने के लिए डिशवॉश लिक्विड भी मददगार हो सकता है। इसकी थोड़ी मात्रा सीधे दाग पर लगाएं और उंगलियों से बहुत हल्के हाथ से फैलाएं।
कुछ मिनट इंतजार करने के बाद कपड़े के फैब्रिक और उसके लेबल पर दिए निर्देश के अनुसार उसे धो लें।
कपड़ा सुखाने से पहले दाग जरूर देखें
कपड़ा धोने के बाद उसे तुरंत ड्रायर या तेज गर्मी में सुखाने से पहले जांच लें कि तेल का दाग पूरी तरह निकला है या नहीं।
अगर दाग अभी भी दिखाई दे रहा है तो दोबारा सफाई की कोशिश करें। दाग पूरी तरह निकलने से पहले कपड़े को तेज गर्मी में सुखाने से बचें, क्योंकि गर्मी दाग को कपड़े में और ज्यादा स्थायी कर सकती है।
पुराने तेल के दाग को ऐसे साफ करें
अगर तेल का दाग पुराना हो गया है तो उसे हटाने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में दाग पर थोड़ा डिशवॉश लिक्विड लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ सकते हैं।
इसके बाद कपड़े के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार उसे धोएं।
नाजुक, रेशमी या महंगे कपड़ों पर कोई भी घरेलू उपाय सीधे इस्तेमाल करने से पहले कपड़े के किसी छिपे हुए हिस्से पर टेस्ट कर लेना बेहतर है। इससे कपड़े का रंग खराब होने या फैब्रिक को नुकसान पहुंचने का जोखिम कम रहेगा।
यह भी पढ़े- जन्माष्टमी 4 या 5 सितंबर? कैलेंडर नहीं, इस नियम से तय होगा व्रत का सही दिन



