अमेरिका-चीन की होड़ बदल रही दुनिया
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया की मौजूदा स्थिति पर अमेरिका की बदली भूमिका और चीन के बढ़ते प्रभाव का गहरा असर पड़ रहा है। जयशंकर ने यह बात 62वें म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कही।
जयशंकर के मुताबिक, आज की वैश्विक व्यवस्था कई बड़े बदलावों से गुजर रही है। इसमें अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, उभरती और मध्यम शक्तियों की बढ़ती आत्मनिर्भरता और देशों की ओर से अपने साझेदारों में विविधता लाने की कोशिश शामिल है।
अमेरिका की बदली भूमिका अहम- जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि आज के वैश्विक हालात काफी हद तक अमेरिका की बदली हुई स्थिति से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जानबूझकर खुद को एक प्रमुख और स्वतंत्र शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
उनके मुताबिक, अमेरिका की नीतियों और उसके बदलते रुख का असर दुनिया के दूसरे देशों पर भी पड़ रहा है।
चीन का बढ़ता प्रभाव भी बड़ी वजह-जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि चीन का उदय मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का दूसरा बड़ा पहलू है। दुनिया की मैन्युफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी करीब एक तिहाई है। उसकी आर्थिक ताकत अब राजनीतिक प्रभाव में भी बदल रही है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा देख रही है। यह मुकाबला केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और रणनीतिक फैसलों पर भी पड़ रहा है।
उभरते देश आत्मनिर्भरता पर दे रहे जोर-जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि भारत समेत कई उभरती और मध्यम आर्थिक शक्तियां अब अपने हितों को लेकर ज्यादा जागरूक हो रही हैं। ये देश अपनी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए ज्यादा विकल्प चाहते हैं और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश अब मजबूत सप्लाई चेन बनाने, नए साझेदार तलाशने और जोखिम कम करने पर ध्यान दे रहे हैं। इसके लिए हर मुद्दे पर सभी देशों का एक जैसा विचार होना जरूरी नहीं है।
साथ काम करने के लिए हर बात पर सहमति जरूरी नहीं
विदेश मंत्री ने कहा कि दो देशों के बीच सहयोग के लिए हर मुद्दे पर पूरी तरह सहमत होना जरूरी नहीं है। अगर कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों देशों के हित मिलते हैं, तो वे साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज के समय में देश अपने रिश्तों में विविधता ला रहे हैं और जोखिम कम करने के लिए कई विकल्प तैयार कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया से एक नया वैश्विक ढांचा धीरे-धीरे तैयार हो रहा है।
अमेरिका और चीन दोनों के साथ रिश्ते संभव
जयशंकर ने कहा कि उभरती और मध्यम ताकतें एक-दूसरे के साथ सहयोग करने के साथ-साथ अमेरिका और चीन दोनों के साथ संबंध बनाए रख सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि उनके हितों में सीधा टकराव न हो।
उन्होंने क्वाड और ब्रिक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग देशों के बीच सहयोग के कई मंच मौजूद हैं।
जयशंकर ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्दर्न सी रूट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट देशों के बीच कनेक्टिविटी और सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने ब्रिक्स को भी एक ऐसा मंच बताया, जहां कई देश एक साथ आकर अपनी सामूहिक आवाज को मजबूत कर सकते हैं।
इसके अलावा जयशंकर ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये भारत की पहल हैं और बदलती वैश्विक व्यवस्था में सहयोग के नए उदाहरण पेश करती हैं।
जयशंकर का कहना है कि दुनिया अब एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां देश केवल एक शक्ति पर निर्भर रहने के बजाय कई साझेदारों के साथ मिलकर अपने हितों और सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं।
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