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harkhand Student Protest: झारखंड में छात्रों का विधानसभा घेराव, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर गरमाया माहौल

रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने…

Niharika Gupta 10 August 2026, 2:39 pm
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harkhand Student Protest: झारखंड में छात्रों का विधानसभा घेराव, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर गरमाया माहौल
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रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार, 10 अगस्त को रांची स्थित विधानसभा की ओर कूच किया। कई दिनों से चल रहा यह आंदोलन अब बड़े टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। छात्रों और सरकार के बीच बातचीत के कई दौर के बावजूद मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा घेराव का फैसला किया।

विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस की ओर से लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल की खबर सामने आई है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

17वें दिन भी जारी रहा छात्रों का आंदोलन

झारखंड में JPSC-JSSC से जुड़े अभ्यर्थियों का आंदोलन 10 अगस्त को 17वें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्र रांची में एकत्र हुए और विधानसभा की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी शिकायतों और मांगों का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से होना चाहिए।

रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच तीन दौर की बातचीत हो चुकी थी, लेकिन बातचीत से गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। इसके बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का निर्णय लिया।

इस आंदोलन ने राज्य में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की चिंताओं को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समय पर भर्ती जैसे मुद्दे लंबे समय से अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।

विधानसभा मार्च से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा

छात्रों के विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। विधानसभा के आसपास निषेधात्मक आदेश लागू किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई।

रिपोर्टों के अनुसार विधानसभा परिसर के आसपास करीब 750 मीटर के क्षेत्र में बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी विधानसभा परिसर के अत्यधिक नजदीक न पहुंच सकें और कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील भी की।

बैरिकेडिंग के पास पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तनाव

विधानसभा की ओर बढ़ रहे छात्रों और पुलिस के बीच बैरिकेडिंग के पास तनाव की स्थिति पैदा हुई। प्रदर्शनकारियों की ओर से आगे बढ़ने की कोशिश और पुलिस की ओर से उन्हें रोकने के बाद स्थिति बिगड़ गई।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।

छात्रों का आरोप है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा की ओर जा रहे थे। वहीं प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही।

सरकार का दावा- 98 प्रतिशत मांगें पूरी – विधानसभा घेराव

इस पूरे विवाद के बीच राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों को पूरा किया जा चुका है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस दावे से पूरी तरह सहमत नहीं हैं और उनका कहना है कि जिन मुख्य मुद्दों को लेकर आंदोलन चल रहा है, उनका समाधान अभी बाकी है।

यही असहमति आंदोलन के जारी रहने की बड़ी वजह बन गई है। सरकार जहां बातचीत और समाधान की बात कर रही है, वहीं अभ्यर्थी अपनी मांगों पर लिखित और स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से भी छात्रों के साथ बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने और न्याय व पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

तीन दौर की बातचीत के बाद भी नहीं निकला समाधान

छात्रों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के कई दौर होने के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। रिपोर्टों के अनुसार तीन दौर की बातचीत के बाद भी दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना रहा।

इसी के बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव को आंदोलन का अगला चरण बनाया। अभ्यर्थियों का मानना है कि विधानसभा तक अपनी आवाज पहुंचाने से सरकार पर उनकी मांगों को लेकर गंभीरता से फैसला लेने का दबाव बढ़ेगा।

यह घटनाक्रम बताता है कि परीक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दे अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि झारखंड की राजनीति में भी महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।

देवेंद्र नाथ महतो भी आंदोलन में शामिल – विधानसभा घेराव

छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी समर्थन मिल रहा है। देवेंद्र नाथ महतो विधानसभा मार्च में छात्रों के साथ नजर आए। रिपोर्टों के मुताबिक वह लगातार अनशन पर थे और सोमवार को एंबुलेंस के जरिए आंदोलन में पहुंचे।

महतो ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

उनकी मौजूदगी से आंदोलन को और अधिक राजनीतिक चर्चा मिली है। इससे पहले भी वह छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं।

JPSC सदस्यों के इस्तीफे से भी बढ़ी चर्चा

परीक्षा विवाद के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े घटनाक्रम ने भी इस मामले को और गंभीर बना दिया। रिपोर्टों के अनुसार बातचीत विफल रहने और आंदोलन बढ़ने के बीच JPSC के कुछ सदस्यों के इस्तीफे की खबर सामने आई।

इस घटनाक्रम ने परीक्षा व्यवस्था, आयोग की कार्यप्रणाली और भर्ती प्रक्रिया में भरोसे को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सरकारी भर्ती परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह का विवाद अभ्यर्थियों के बीच चिंता पैदा करता है।

छात्रों की विधानसभा घेराव से बड़ी चिंता क्या है?

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक परीक्षा केवल एक पेपर नहीं होती। इसके पीछे कई वर्षों की मेहनत, आर्थिक खर्च और करियर की उम्मीद जुड़ी होती है।

यही वजह है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी या प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग करते हैं।

JPSC और JSSC झारखंड में सरकारी नियुक्तियों से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। इनके माध्यम से होने वाली भर्ती में हजारों पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का समाधान करना सरकार और संबंधित संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

आंदोलन का राजनीतिक असर भी दिखा

छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं की सक्रियता भी देखने को मिली। रिपोर्टों में विपक्षी नेताओं की हिरासत और आंदोलन को समर्थन देने की घटनाओं का उल्लेख है।

इससे परीक्षा विवाद राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की मांगों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार की ओर से बातचीत और मांगों के समाधान की बात कही जा रही है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच फिर से बातचीत होती है या आंदोलन आगे और तेज होता है।

रांची में सुरक्षा के बीच प्रदर्शन

विधानसभा घेराव को देखते हुए केवल विधानसभा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रांची के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।

रिपोर्टों के अनुसार कुछ इलाकों में स्कूलों को भी बंद रखा गया और प्रशासन ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।

प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया पर वायरल कुछ दावों को लेकर भी स्पष्टीकरण दिए जाने की खबर है। इसका उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान अफवाहों को फैलने से रोकना रहा।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि JPSC-JSSC परीक्षा विवाद का समाधान कैसे निकलेगा और छात्रों का आंदोलन कब खत्म होगा?

सरकार बातचीत के जरिए समाधान की बात कर रही है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं। तीन दौर की बातचीत के बाद भी आंदोलन जारी रहना बताता है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी बनी हुई है।

यदि सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच फिर से बातचीत होती है और प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाता है, तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है। लेकिन यदि गतिरोध जारी रहता है, तो प्रदर्शन आगे भी जारी रह सकता है।

छात्रों के भविष्य से जुड़ा है पूरा विवाद

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद केवल एक परीक्षा या एक भर्ती तक सीमित नहीं है। यह राज्य के हजारों युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में उनके भरोसे से जुड़ा मामला है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समय पर नियुक्ति युवाओं की प्रमुख अपेक्षाएं हैं। इसलिए सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम किया जाए।

वर्तमान स्थिति में दोनों पक्षों के लिए बातचीत का रास्ता ही सबसे महत्वपूर्ण दिखाई देता है। छात्रों की शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा और सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब इस विवाद को शांत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

निष्कर्ष

झारखंड छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। 10 अगस्त को रांची में विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव तथा लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

यह भी पढ़ें – अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने रचा इतिहास, HAPIDA SKYNEX की फ्लाइंग कार ने भरी पहली उड़ान

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Niharika Gupta

NAV24 News की संपादकीय टीम से प्रकाशित रिपोर्ट।

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