Skip to content
Monday, 5 October 2026 NAV24 NEWS • हिंदी न्यूज़
FacebookInstagramYouTube
Nav24News
  • समाचार
    • व्यापार
    • दुनिया
    • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • खेल
    • Matches
  • ज्योतिष
  • स्वास्थ्य
  • शहर और राज्य
  • खबर ज़रा हटके
लाइव
होम / SPIRITUAL / Kashi Nag पंचमी : लुप्त हो रही ‘महुअर’…
SPIRITUAL

Kashi Nag पंचमी : लुप्त हो रही ‘महुअर’ की परंपरा, जानें काशी की अनोखी परंपरा

काशी की नाग पंचमी और ‘महुअर’ की अनोखी परंपरा Nag पंचमी – काशी को सिर्फ मंदिरों और धार्मिक आस्था की नगरी नहीं कहा जाता, बल्कि यहां की पहचान सदियों पुरानी लोक परंपराओं…

Niharika Gupta 17 August 2026, 6:46 pm
1 मिनट पढ़ें
Kashi Nag पंचमी : लुप्त हो रही ‘महुअर’ की परंपरा, जानें काशी की अनोखी परंपरा
SHARE Facebook X WhatsApp Telegram

काशी की नाग पंचमी और ‘महुअर’ की अनोखी परंपरा

Nag पंचमी – काशी को सिर्फ मंदिरों और धार्मिक आस्था की नगरी नहीं कहा जाता, बल्कि यहां की पहचान सदियों पुरानी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी है। सालभर यहां अलग-अलग पर्वों पर ऐसी परंपराएं देखने को मिलती हैं, जिनका अपना अलग इतिहास और महत्व है।

नाग पंचमी भी काशी के लिए ऐसा ही खास पर्व है। इस दिन नाग देवता की पूजा के साथ शहर में कई पारंपरिक आयोजन होते रहे हैं। इन्हीं में ‘महुअर’ की परंपरा भी शामिल रही है, जो अब धीरे-धीरे लोगों की स्मृतियों तक सिमटती जा रही है।

एक दौर था जब नाग पंचमी के अवसर पर काशी के अलग-अलग इलाकों में महुअर की परंपरा को लेकर खास उत्साह दिखाई देता था। लेकिन समय के साथ जीवनशैली बदली, मनोरंजन के साधन बदले और नई पीढ़ी का पारंपरिक आयोजनों से जुड़ाव कम हुआ। इसका असर इस लोक परंपरा पर भी पड़ा है।

क्या है पंचमी पर ‘महुअर’ की परंपरा?

काशी की नाग पंचमी से जुड़ी महुअर एक ऐसी लोक-सांस्कृतिक परंपरा रही है, जिसका संबंध पर्व के दौरान होने वाले पारंपरिक आयोजन और लोक मनोरंजन से रहा है।

इस परंपरा की खासियत यह थी कि यह सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहती थी। इसमें स्थानीय संस्कृति, संगीत और सामुदायिक भागीदारी की झलक भी देखने को मिलती थी।

पुरानी पीढ़ी के लोग आज भी उस दौर को याद करते हैं, जब नाग पंचमी के अवसर पर शहर में पारंपरिक रंग दिखाई देता था। महुअर भी इसी सांस्कृतिक माहौल का एक हिस्सा थी।

लेकिन आज परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं।

आधुनिकता ने बदली काशी की तस्वीर – पंचमी

समय के साथ काशी में भी आधुनिक जीवनशैली का प्रभाव बढ़ा है। मनोरंजन के नए साधन लोगों की पहुंच में हैं। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और डिजिटल मनोरंजन ने पारंपरिक सामुदायिक आयोजनों की जगह काफी हद तक ले ली है।

पहले पर्व और त्योहार पूरे मोहल्ले और समुदाय के लिए सामूहिक उत्सव का अवसर होते थे। लोग एक जगह इकट्ठा होते थे और स्थानीय परंपराओं में भाग लेते थे।

अब त्योहार मनाने का तरीका बदल रहा है। यही बदलाव उन परंपराओं को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है, जिनका संरक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से होता था।

महुअर की परंपरा भी इसी बदलाव की चपेट में है।

नई पीढ़ी से टूट रहा जुड़ाव

किसी भी लोक परंपरा को जिंदा रखने में नई पीढ़ी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। अगर युवा उस परंपरा को समझें, उसमें भाग लें और उसे आगे बढ़ाएं, तो वह लंबे समय तक जीवित रहती है।

महुअर के साथ समस्या यह है कि नई पीढ़ी का इससे जुड़ाव पहले की तुलना में काफी कम हुआ है।

युवा पीढ़ी आधुनिक संगीत, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नए मनोरंजन के साधनों से ज्यादा जुड़ी है। ऐसे में पारंपरिक लोक आयोजनों के लिए समय और रुचि दोनों कम होती जा रही हैं।

इसका परिणाम यह है कि जिन परंपराओं को कभी सामान्य जीवन का हिस्सा माना जाता था, वे अब धीरे-धीरे दुर्लभ होती जा रही हैं।

काशी की संस्कृति में नाग पंचमी का खास महत्व

नाग पंचमी काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में विशेष महत्व रखती है। इस दिन नाग देवता की पूजा के लिए श्रद्धालु मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं।

वाराणसी के नागकूप पर भी नाग पंचमी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन और श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। काशी में नाग पंचमी से जुड़ी परंपराओं में पूजा के साथ दंगल और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का भी उल्लेख मिलता है।

यही वजह है कि काशी की नाग पंचमी को केवल धार्मिक पर्व के तौर पर नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में भी देखा जाता है।

नागकूप से लेकर लोक परंपराओं तक खास है काशी

काशी में नाग पंचमी के दौरान नागकूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यहां नाग पंचमी के दिन पूजा-अर्चना और दर्शन करने से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नागकूप पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां काशी की पुरानी परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है।

ऐसे में महुअर जैसी परंपराओं का खत्म होना सिर्फ किसी एक आयोजन का समाप्त होना नहीं है, बल्कि यह शहर की लोक-सांस्कृतिक विरासत के कमजोर होने का संकेत भी माना जा सकता है।

कभी त्योहारों में दिखती थी सामुदायिक भागीदारी

पुराने समय में त्योहारों का स्वरूप काफी अलग था। पर्व आते ही मोहल्लों में तैयारियां शुरू हो जाती थीं। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी अपनी-अपनी भूमिका निभाते थे।

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ लोक मनोरंजन और सामूहिक कार्यक्रम भी होते थे। इससे एक तरफ परंपराएं आगे बढ़ती थीं, वहीं दूसरी तरफ समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता था।

महुअर जैसी परंपराओं की अहमियत इसी सामुदायिक वातावरण में थी।

आज जब त्योहारों का स्वरूप अधिक निजी और डिजिटल होता जा रहा है, तो ऐसी परंपराओं के लिए जगह लगातार कम हो रही है।

सिर्फ महुअर नहीं, कई लोक परंपराओं पर संकट

काशी में महुअर की परंपरा का कमजोर होना एक व्यापक सांस्कृतिक बदलाव की ओर भी इशारा करता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय गीत, लोक वाद्य, पारंपरिक खेल, मेले और सामुदायिक आयोजन धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। कुछ परंपराएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं तो कुछ सिर्फ बुजुर्गों की यादों में बची हैं।

इन परंपराओं को बचाने के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय समुदाय और नई पीढ़ी की भागीदारी भी जरूरी है।

संरक्षण के लिए दस्तावेजीकरण जरूरी

विशेषज्ञों और संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसी परंपराओं का दस्तावेजीकरण करना है।

अगर महुअर से जुड़े पुराने गीत, वादन, आयोजन की शैली और इससे जुड़े लोगों की यादों को रिकॉर्ड किया जाए तो आने वाली पीढ़ियों को इस परंपरा के बारे में जानकारी मिल सकती है।

स्थानीय स्कूलों, सांस्कृतिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के जरिए भी ऐसी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।

त्योहारों में फिर से जोड़ी जा सकती हैं पुरानी परंपराएं

महुअर जैसी परंपराओं को दोबारा लोकप्रिय बनाने का एक तरीका यह हो सकता है कि इन्हें नाग पंचमी के सार्वजनिक आयोजनों का हिस्सा बनाया जाए।

अगर स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और युवाओं को इन परंपराओं से जोड़ने के लिए प्रतियोगिताएं या कार्यशालाएं आयोजित की जाएं, तो पुरानी संस्कृति को नए स्वरूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।

इससे परंपरा भी बचेगी और नई पीढ़ी को अपनी स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने का अवसर भी मिलेगा।

सोशल मीडिया बन सकता है संरक्षण का माध्यम

जिस डिजिटल माध्यम को लोक परंपराओं के कमजोर होने की एक वजह माना जाता है, उसी का इस्तेमाल इनके संरक्षण के लिए भी किया जा सकता है।

महुअर से जुड़े वीडियो, पुराने कलाकारों के इंटरव्यू, लोकगीत और इतिहास को सोशल मीडिया पर साझा किया जा सकता है।

इससे काशी से बाहर रहने वाले लोग भी इस परंपरा से परिचित हो सकते हैं। युवा वर्ग तक पहुंचने के लिए डिजिटल माध्यम बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।

काशी की पहचान सिर्फ मंदिरों से नहीं – नाग पंचमी भा हैं

काशी की पहचान विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट और धार्मिक आस्था से जरूर जुड़ी है, लेकिन शहर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान उसकी लोक परंपराओं में भी बसती है।

यहां की बोली, संगीत, खान-पान, त्योहार, अखाड़े, मेले और लोक आयोजन काशी को दूसरे शहरों से अलग बनाते हैं।

इसलिए महुअर जैसी छोटी दिखने वाली परंपरा का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। यह काशी के सांस्कृतिक इतिहास का एक हिस्सा है।

क्या महुअर फिर सुनाई देगी?

आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले वर्षों में नाग पंचमी पर काशी में महुअर की पुरानी परंपरा फिर से अपने पूरे रंग में दिखाई देगी?

इसके लिए जरूरी है कि पुराने जानकारों की यादों और अनुभवों को रिकॉर्ड किया जाए। कलाकारों को प्रोत्साहन दिया जाए और युवाओं को इस परंपरा से जोड़ा जाए।

अगर ऐसा नहीं किया गया तो महुअर भी उन कई लोक परंपराओं की सूची में शामिल हो सकती है, जिनका अस्तित्व सिर्फ किताबों और बुजुर्गों की यादों तक सीमित रह गया।

निष्कर्ष

काशी में नाग पंचमी की ‘महुअर’ परंपरा आधुनिकता के दौर में धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। कभी यह काशी की नाग पंचमी से जुड़े पारंपरिक सांस्कृतिक माहौल का अहम हिस्सा थी, लेकिन बदलती जीवनशैली और नई पीढ़ी के कम होते जुड़ाव ने इसके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह भी पढ़ें – BJP New Team Full List: नितिन नबीन की टीम में किसे मिली जगह?

यह खबर शेयर करें
REPORTER / AUTHOR

Niharika Gupta

NAV24 News की संपादकीय टीम से प्रकाशित रिपोर्ट।

लेखक की और खबरें →
MORE ON THIS STORY

संबंधित खबरें

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्रि, जानें घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिनों का पूरा कैलेंडर
SPIRITUAL

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्रि, जानें घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिनों का पूरा कैलेंडर

2 days पहले
पितृ पक्ष : नौकरीपेशा लोग कैसे करें श्राद्ध? सुबह तर्पण करें या दोपहर तक रुकना जरूरी?
SPIRITUAL

पितृ पक्ष : नौकरीपेशा लोग कैसे करें श्राद्ध? सुबह तर्पण करें या दोपहर तक रुकना जरूरी?

5 days पहले
Dussehra 2026: कब है दशहरा ? जानें तारीख, विजय मुहूर्त, रावण दहन और पूजा विधि
SPIRITUAL

Dussehra 2026: कब है दशहरा ? जानें तारीख, विजय मुहूर्त, रावण दहन और पूजा विधि

5 days पहले
पितृ पक्ष में पितरों की शांति के लिए करें जल से जुड़े ये आसान उपाय
SPIRITUAL

पितृ पक्ष में पितरों की शांति के लिए करें जल से जुड़े ये आसान उपाय

6 days पहले

अभी महत्वपूर्ण

दक्षिण अफ्रीका में दो जगह ताबड़तोड़ फायरिंग, 27 की मौत और 26 घायल; हमलावरों की तलाश जारी आजादी के दशकों बाद भी बघरोली गांव में नहीं बना मुक्तिधाम, बारिश में शव ले जाना बना मुश्किल VIDEO: मलबे में दबा छात्र, फिर भी फोन से लगाई मदद की गुहार; दिल्ली PG बिल्डिंग हादसे का दिल दहला देने वाला वीडियो चमोली में टनल हादसा, 3 मजदूरों की मौत; 16 लोगों का रेस्क्यू
NAV24 NEWSROOM

महत्वपूर्ण जानकारी

हमारे बारे मेंNAV24 News और हमारी टीम संपर्क करेंसुझाव, खबर और प्रतिक्रिया प्राइवेसी पॉलिसीडेटा और गोपनीयता जानकारी डिस्क्लेमरप्रकाशन संबंधी जानकारी
NAV24 CONNECT

सोशल मीडिया पर जुड़ें

FacebookInstagramYouTube
Facebook@nav24newsofficial Instagram@nav24news YouTube@OfficialNav24news
SECTION WATCH

SPIRITUAL

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्रि, जानें घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिनों का पूरा कैलेंडर

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्रि, जानें घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिनों का पूरा कैलेंडर

2 days पहले
पितृ पक्ष : नौकरीपेशा लोग कैसे करें श्राद्ध? सुबह तर्पण करें या दोपहर तक रुकना जरूरी?

पितृ पक्ष : नौकरीपेशा लोग कैसे करें श्राद्ध? सुबह तर्पण करें या दोपहर तक रुकना जरूरी?

5 days पहले
Dussehra 2026: कब है दशहरा ? जानें तारीख, विजय मुहूर्त, रावण दहन और पूजा विधि

Dussehra 2026: कब है दशहरा ? जानें तारीख, विजय मुहूर्त, रावण दहन और पूजा विधि

5 days पहले
पितृ पक्ष में पितरों की शांति के लिए करें जल से जुड़े ये आसान उपाय

पितृ पक्ष में पितरों की शांति के लिए करें जल से जुड़े ये आसान उपाय

6 days पहले
LATEST

ताज़ा खबरें

घर गिरने से पहले मिलते हैं ये संकेत, दरवाजे फंसने से लेकर दीवारों में दरार तक को न करें नजरअंदाज

घर गिरने से पहले मिलते हैं ये संकेत, दरवाजे फंसने से लेकर दीवारों में दरार तक को न करें नजरअंदाज

11 hours पहले
तिरुवनंतपुरम की BJP पार्षद आर. श्रीलेखा के इस्तीफे पर विवाद, WhatsApp मैसेज से मचा हंगामा

तिरुवनंतपुरम की BJP पार्षद आर. श्रीलेखा के इस्तीफे पर विवाद, WhatsApp मैसेज से मचा हंगामा

11 hours पहले
दिल्ली में सीवर और पानी की व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 10 साल में खर्च होंगे करीब 18 हजार करोड़ रुपये

दिल्ली में सीवर और पानी की व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 10 साल में खर्च होंगे करीब 18 हजार करोड़ रुपये

12 hours पहले
DDA ने लॉन्च किया MPD-2047 का डिजिटल लैंड यूज मैप, प्लॉट स्तर तक मिलेगी जमीन की जानकारी

DDA ने लॉन्च किया MPD-2047 का डिजिटल लैंड यूज मैप, प्लॉट स्तर तक मिलेगी जमीन की जानकारी

12 hours पहले
1 नवंबर से 50% Work From Home, निर्माण पर भी पाबंदी

1 नवंबर से 50% Work From Home, निर्माण पर भी पाबंदी

12 hours पहले
EXPLORE

कैटेगरी

समाचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी खेल स्वास्थ्य ज्योतिष शहर और राज्य व्यापार अर्थव्यवस्था खबर ज़रा हटके
NAV24 NEWS

तेज़, स्पष्ट और जिम्मेदार हिंदी पत्रकारिता — बड़ी खबरें, राज्य, टेक, खेल और विश्लेषण एक पेशेवर डिजिटल न्यूज़रूम प्रस्तुति में।

FacebookInstagramYouTube

प्रमुख सेक्शन

  • समाचार
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • खेल
  • ज्योतिष
  • स्वास्थ्य
  • व्यापार
  • अर्थव्यवस्था
  • शहर और राज्य
  • खबर ज़रा हटके

हमारे बारे में

  • हमारे बारे में
  • संपर्क करें
  • प्राइवेसी पॉलिसी
  • डिस्क्लेमर

फॉलो करें

Facebook, Instagram और YouTube पर NAV24 News से जुड़ें और ब्रेकिंग अपडेट सबसे पहले पाएँ।

YouTube चैनल
© 2026 NAV24 NEWS. सर्वाधिकार सुरक्षित। Design by Sync Soft Solution • Web Design, Development & Digital Marketing Agency • Delhi NCR, India