मेघालय हनीमून मर्डर केस की आरोपी सोनम रघुवंशी की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत को लेकर दो विकल्प दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि या तो वह मेघालय पुलिस की जमानत रद्द करने की याचिका पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फैसला करेगा, या फिर सोनम सरेंडर करें और ट्रायल कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद दोबारा जमानत के लिए आवेदन करें।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने सोनम के वकील से कहा है कि वे अपने मुवक्किल से बात करके अगली सुनवाई में जवाब दें। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
यह मामला इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है। राजा की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए थे। वहां चेरापूंजी में राजा लापता हो गए और बाद में उनका शव एक गहरी खाई से मिला।
पुलिस जांच के बाद सोनम रघुवंशी, उनके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। जून 2025 में सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी के समय लापरवाही से तैयार किया गया अरेस्ट मेमो सोनम की ज़मानत का आधार बन गया. पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी में हत्या के लिए लगने वाली बीएनएस की धारा 103 की जगह धारा 403 लिख दिया गया, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा ही नहीं है. निचली अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को सोनम को सशर्त जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी का सही कारण न बताना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का सीधा उल्लंघन है. 29 जून को हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत का आदेश बरकरार रखा.
मेघालय पुलिस की याचिका पर नोटिस जारी किया था
3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस की याचिका पर नोटिस जारी किया था. मंगलवार, 21 जुलाई को पुलिस की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विस्तृत बहस की. उन्होंने कहा कि सोनम लंबे समय तक फरार रही. उसने अपने सहयोगियों के कहने पर खुद सरेंडर किया. उसे पता था कि वह क्यों फरार है और क्यों सरेंडर कर रही है. उसकी गिरफ्तारी के समय पुलिस की तरफ से भी इसकी जानकारी दी गई. बाद में मजिस्ट्रेट ने भी गिरफ्तारी का आधार बताया. ऐसे में मानवीय भूल से अरेस्ट मेमो में एक धारा का गलत उल्लेख ज़मानत का आधार नहीं हो सकता.
जज इस बात से सहमत नज़र आए कि सोनम को गिरफ्तारी का कारण पता था.
जज इस बात से सहमत नज़र आए कि सोनम को गिरफ्तारी का कारण पता था. ऐसे में उसकी ज़मानत का आधार यह नहीं हो सकता कि उन्हें बिना कारण बताए गिरफ्तार किया गया. जब सोनम के वकील जिरह के लिए उठे तो जजों ने कहा कि वह मेरिट (केस के तथ्यों) के आधार पर जमानत पर फैसला लेंगे. अगर वह ऐसा नहीं चाहते तो फिलहाल सरेंडर करें और मामले में गवाही पूर्ण होने के बाद ज़मानत की मांग करें. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सोनम सरेंडर करती है तो वह निचली अदालत को गवाहों के तेज़ी से परीक्षण के लिए कहेगा.
