NTA Exam System Reform 2026: देश की बड़ी प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA में बड़े स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। NEET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बाद अब परीक्षा व्यवस्था में अस्थायी यानी एडहॉक सिस्टम खत्म करने की तैयारी है। NTA अगले तीन महीने में एडहॉक व्यवस्था को समाप्त कर स्थायी नियुक्तियों की ओर बढ़ने की योजना पर काम कर रहा है।
इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली में साइबर सिक्योरिटी मजबूत करने, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने, प्रश्नपत्रों की जांच के लिए चार स्तर की व्यवस्था लागू करने और विशेषज्ञों की टीम में बदलाव जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। NTA ने करीब 600 विशेषज्ञों को परीक्षा प्रक्रिया से हटाकर नए विशेषज्ञों की भर्ती शुरू की है।
इस पूरे बदलाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी NTA से परीक्षा सुधारों पर विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार सिर्फ किसी विवाद के बाद किए जाने वाले अस्थायी उपाय नहीं होने चाहिए, बल्कि संस्थागत और स्थायी बदलाव होने चाहिए।
तीन महीने में खत्म होगी एडहॉक व्यवस्था
NTA में अब सबसे बड़ा बदलाव अस्थायी कर्मचारियों और विशेषज्ञों पर निर्भरता कम करना है। एजेंसी के मुताबिक अगले तीन महीनों में एडहॉक व्यवस्था खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए 20 से ज्यादा स्थायी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही NTA ने कई महत्वपूर्ण प्रोफेशनल पदों के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए हैं। इनमें Chief Technology Officer, Chief Finance Officer, Chief Information Security Officer और टेस्ट सिक्योरिटी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा साइकोमेट्रिक्स से जुड़े वरिष्ठ पद शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य ऐसी टीम तैयार करना है, जिसके पास परीक्षा आयोजित करने का स्थायी अनुभव और संस्थागत विशेषज्ञता हो।
600 विशेषज्ञों को परीक्षा प्रक्रिया से हटाया
NTA के परीक्षा सिस्टम में एक और बड़ा बदलाव करीब 600 विशेषज्ञों को हटाने का है। इन विशेषज्ञों की जगह अब नए प्रोफेशनल्स और विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है।
नई टीम में साइबर सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स, टेक्नोलॉजी और प्रश्नपत्र तैयार करने जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का मानना है कि आधुनिक परीक्षाओं के लिए केवल पारंपरिक परीक्षा विशेषज्ञ पर्याप्त नहीं हैं। डिजिटल सिस्टम और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट्स की जरूरत भी है।
हर प्रश्नपत्र की चार स्तर पर जांच
NTA की नई व्यवस्था में प्रश्नपत्रों की जांच को भी ज्यादा मजबूत किया जा रहा है। अब परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की चार स्तर पर जांच किए जाने की व्यवस्था लागू की जा रही है।
इसका उद्देश्य प्रश्नों में गलती, गलत अनुवाद, तथ्यात्मक त्रुटि या किसी अन्य समस्या को परीक्षा से पहले ही पकड़ना है।
हाल के दिनों में UGC-NET के कुछ प्रश्नपत्रों में सामने आई गलतियों के बाद यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार अब प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके अंतिम इस्तेमाल तक कई स्तरों पर जांच की व्यवस्था कर रही है।
साइबर सिक्योरिटी पर खास फोकस
NTA के नए सुधारों में साइबर सिक्योरिटी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। परीक्षा से जुड़ा डेटा, प्रश्नपत्र, उम्मीदवारों की जानकारी और डिजिटल सिस्टम सुरक्षित रखने के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है।
NTA में साइबर सिक्योरिटी से जुड़े विशेषज्ञों की भर्ती की जा रही है। इसके साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान NTA से पूछा कि क्या उसके पास डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अलग अधिकारी और विभाग है। कोर्ट ने परीक्षा संबंधी डेटा के लिए सुरक्षित और मजबूत डेटाबेस की जरूरत पर भी जोर दिया।
NTA ऑफिस में बढ़ेगी सुरक्षा
परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए NTA के कार्यालयों की सुरक्षा में भी बदलाव किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक NTA के कार्यालयों को सरकारी परिसरों में स्थानांतरित करने और सुरक्षा के लिए CISF की तैनाती की योजना है।
इसके अलावा ऑफिस में बायोमेट्रिक एक्सेस, CCTV निगरानी और बेहतर डिजिटल सिक्योरिटी सिस्टम लगाने पर जोर दिया जा रहा है।
इसका उद्देश्य परीक्षा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों और डिजिटल डेटा तक अनधिकृत पहुंच को रोकना है।
प्रश्नपत्र की सुरक्षा होगी और मजबूत

NEET जैसी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दों में से एक रही है। अब प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि NEET के प्रश्नपत्रों की आवाजाही को GPS के जरिए ट्रैक किया जा रहा है। सरकार ने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बताया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा करने के बजाय स्थायी संस्थागत सुधारों की जरूरत पर जोर दिया है।
UPSC की तर्ज पर मजबूत संस्था बनाने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही है। कोर्ट ने UPSC का उदाहरण देते हुए कहा कि नियमित रूप से परीक्षाएं आयोजित करने वाली संस्था समय के साथ विशेषज्ञता और संस्थागत स्मृति विकसित करती है।
NTA को भी ऐसी ही विशेषज्ञता विकसित करने की जरूरत है। इसका मतलब है कि एजेंसी को हर परीक्षा के लिए अलग-अलग अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्थायी टीम और विशेषज्ञता तैयार करनी होगी।
यही कारण है कि स्थायी भर्ती को NTA के मौजूदा सुधार अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।
NTA में नए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट आएंगे
नई व्यवस्था में टेक्नोलॉजी से जुड़े पदों को खास महत्व दिया गया है। NTA अपने स्तर पर टेक्नोलॉजी टीम तैयार कर रहा है और इसके लिए NIC यानी National Informatics Centre की मदद भी ली जा रही है।
इसके अलावा निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया जा रहा है। साइबर सिक्योरिटी, टेस्ट सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की जरूरत को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रश्न बैंक को भी बनाया जा रहा है सुरक्षित
NTA परीक्षा प्रणाली में प्रश्न बैंक को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि करीब 500 प्रश्नों का एक प्रश्न बैंक 13 भारतीय भाषाओं में तैयार किया जा रहा है।
इसके अनुवाद में मानवीय हस्तक्षेप रखा जा रहा है। साथ ही स्वदेशी AI मॉडल की मदद लेने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल AI पर निर्भर रहने की योजना नहीं है।
इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में प्रश्नपत्रों के अनुवाद के दौरान होने वाली गलतियों को कम करना है।
UGC-NET की गलतियों के बाद बढ़ा दबाव
NTA में सुधार की प्रक्रिया को हालिया UGC-NET विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में गलतियां सामने आने के बाद इन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया गया।
इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने NTA की परीक्षा प्रणाली की समीक्षा शुरू की। NTA के 50 से अधिक कर्मचारियों को हटाए जाने और नई विशेषज्ञ टीम तैयार करने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब 600 विशेषज्ञों को परीक्षा प्रक्रिया से हटाने और नई विशेषज्ञ टीम तैयार करने की जानकारी सामने आने के बाद NTA में सुधार का दायरा और बड़ा दिखाई दे रहा है।
NEET के बाद परीक्षा सिस्टम पर उठे सवाल
NEET-UG को लेकर पिछले वर्षों में प्रश्नपत्र सुरक्षा, परीक्षा प्रक्रिया और परिणाम से जुड़े विवाद सामने आए थे। इन विवादों के बाद NTA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे।
सरकार ने इसके बाद हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया शुरू की। अब इन सिफारिशों को जमीन पर लागू करने की कोशिश तेज की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी मामले में NTA से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा पूरा रोडमैप
19 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने NTA में सुधार को लेकर केंद्र से विस्तृत जानकारी मांगी। अदालत ने संस्थागत सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारियों, साइबर सिक्योरिटी और परीक्षा से जुड़े डेटा की सुरक्षा पर सवाल किए।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि NTA में कितने वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, उन्होंने पद संभाल लिया है या नहीं और एजेंसी के पास परीक्षा संचालन के लिए पर्याप्त सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर है या नहीं।
केंद्र ने अदालत को बताया कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया जारी है।
छात्रों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती
NTA के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल परीक्षा सिस्टम को तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाना नहीं है। इसके सामने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा वापस हासिल करने की चुनौती भी है।
देश में लाखों छात्र हर साल NEET, JEE, CUET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इन परीक्षाओं के परिणाम उनके करियर और भविष्य पर सीधा असर डालते हैं।
इसलिए एक छोटी सी गलती भी हजारों या लाखों उम्मीदवारों को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि अब NTA के सुधारों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
आगे क्या बदलेगा?
NTA की नई व्यवस्था लागू होने के बाद परीक्षा से जुड़े कई स्तरों पर बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
स्थायी कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी। टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े विशेषज्ञों की टीम मजबूत होगी। प्रश्नपत्रों की चार स्तर पर जांच होगी। संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। कार्यालयों में भी सुरक्षा के नए मानक लागू होंगे।
इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में संस्थागत अनुभव विकसित करने पर जोर रहेगा।
छात्रों के लिए क्या मायने हैं?
NTA में होने वाले इन बदलावों का सीधा असर देशभर के छात्रों पर पड़ेगा। अगर नई व्यवस्था सफल होती है तो परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, गलत प्रश्न और अनुवाद संबंधी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि परीक्षा की तारीख, प्रश्नपत्र, रिजल्ट और पूरी प्रक्रिया को लेकर भरोसा बढ़े।
हालांकि सुधारों का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब नई व्यवस्था लगातार और प्रभावी तरीके से लागू हो।
निष्कर्ष
NTA Reform 2026 के तहत परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है। अगले तीन महीनों में एडहॉक सिस्टम खत्म करने और स्थायी नियुक्तियों की दिशा में आगे बढ़ने की योजना है। NTA ने 20 से ज्यादा स्थायी पदों पर भर्ती शुरू की है और टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, टेस्ट सिक्योरिटी और साइकोमेट्रिक्स जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है।
करीब 600 विशेषज्ञों को परीक्षा प्रक्रिया से हटाने, प्रश्नपत्रों की चार स्तर पर जांच, NTA कार्यालयों की सुरक्षा मजबूत करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि NTA में सुधार अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। एजेंसी को UPSC की तरह स्थायी विशेषज्ञता और संस्थागत क्षमता विकसित करनी होगी।
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