Sun. Jul 19th, 2026

राम जन्मभूमि चंदा मामले को लेकर निर्मोही अखाड़ा ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अखाड़े ने अदालत में याचिका दाखिल कर नए सिरे से राम मंदिर ट्रस्ट का गठन करने और ट्रस्ट में अपने प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।

इसके अलावा, निर्मोही अखाड़ा ने ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड (बही-खातों) का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि मंदिर के गर्भगृह में वर्ष 1950 और 1982 में स्थापित प्रतिमाओं को फिर से स्थापित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (20 जुलाई, 2026) को राम जन्मभूमि चंदा मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई होने वाली है. उस दिन निर्मोही अखाड़ा की इस याचिका को भी रखा जा सकता है. बता दें कि निर्मोही अखाड़ा भी राम जन्मभूमि मामले में एक पक्ष था. उसने दावा किया था कि मूल मंदिर के विध्वंस से पहले वहां उसके साधु पूजा करते थे. इसलिए नए राम मंदिर में उसे ही सेवायत का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया था, लेकिन नए ट्रस्ट में निर्मोही के भी एक प्रतिनिधि को शामिल करने के लिए कहा था. 

अखाड़े ने केंद्र सरकार पर लगाया आरोप

निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा कि साल 2019 में आए ऐतिहासिक फैसले को करीब सात साल बीत चुके हैं, लेकिन उस फैसले को अभी तक उसकी मूल भावना के मुताबिक लागू नहीं किया गया है. अखाड़े ने इसके लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का पूरी तरीके से पालन नहीं किया, इसलिए आज हमारे सामने ऐसी परिस्थिति उभरकर सामने आई है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *