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Fri. Jul 3rd, 2026

भारतीय कामगारों के लिए रूस से बड़ी खुशखबरी आई है। मजदूरों और कुशल कर्मचारियों की कमी को देखते हुए रूस ने भारतीय वर्कर्स के लिए रोजगार के नए अवसर खोले हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस में श्रमिकों की भारी कमी हो गई है। पहले रूस मुख्य रूप से पूर्व सोवियत संघ के देशों से कामगार बुलाता था, लेकिन हालात बदलने के बाद अब उसने भारत की ओर रुख किया है। रूस की ओर से जारी ताजा जानकारी के अनुसार, वहां काम कर रहे भारतीय वर्कर्स की संख्या बढ़कर 70,000 तक पहुंच गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारतीय कामगारों के लिए रूस में रोजगार के और भी अवसर बढ़ सकते हैं।

रूसी समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मजदूरों की रूस में विभिन्‍न उद्योगों में भारी मांग है। भारत में रूस के कार्यवाहक राजदूत रोमन बाबूश्किन ने एक मजदूरों को लेकर आयोज‍ित कार्यक्रम में कहा कि भारतीय मजदूरों की खेती, कंस्‍ट्रक्‍शन, हाउसिंग और पब्लिक यूटिल‍िटी, खनन, तेल और गैस, रेल ट्रांसपोर्ट, जहाज निर्माण, कपड़ा उद्योग, फार्मासूटिकल, हेल्‍थकेयर, सूचना प्रौद्योगिकी और सेवाओं में भारी डिमांड है।

रोमन बाबूश्किन ने कहा कि लेबर मोबिलिटी भारत और रूस के बीच सहयोग में एक नया क्षेत्र है जो व्‍यापार और आर्थिक रिश्‍तों में विविधता लाने में दोनों देशों के बीच ‘खास और रणनीतिक भागीदारी’ को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। रोमन बाबूश्किन ने बताया कि दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान 2 अंतर सरकारी समझौते पर हस्‍ताक्षर हुए थे। इसमें अवैध प्रवासन से निपटने में सहयोग और दोनों ही देशों में एक-दूसरे के नागरिकों को अल्‍पकाल के नौकरी देना शामिल है।

रूस के कार्यवाहक राजदूत ने कहा कि लेबर मोबिल‍िटी अब भारत और रूस के बीच बाचतीत का अभिन्‍न हिस्‍सा हो गया है। उन्‍होंने ज्‍यादा व्‍यवस्थित रवैये के लिए आह्वान किया ताकि प्रवासन नियम के मुताबिक, पारदर्शी और जिम्‍मेदार बना रहे। उन्‍होंने भारतीय मजदूरों की भर्ती के लिए एक नए समझौते का मसौदा बनाने का प्रस्‍ताव दिया। बता दें कि रूस की योजना है कि साल 2026 में कम से कम 40 हजार नए भारतीयों को नौकरी दी जाए। रूस की जनसंख्‍या कम हो रही है और उसे लोगों की सख्‍त जरूरत है। इसके अलावा बड़ी संख्‍या में लोग रूस छोड़कर जा रहे हैं। इससे वहां भारतीयों की मांग बढ़ती जा रही है।

आपको बता दें कि भारतीय मजदूरों को आधिकारिक और अनाधिकारी एजेंसियों की मदद से भर्ती किया जा रहा है। ये एजेंसियां जॉब और काम के माहौल के बारे में बताती हैं। रूस में ऐसे कामगारों को 556 डॉलर से लेकर 1112 डॉलर तक हर महीने दिया जा रहा है।

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