सनातन धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, वाणी और कला की देवी माना जाता है। हर साल विद्यार्थी, शिक्षक और संगीत व कला से जुड़े लोग मां सरस्वती की पूजा करते हैं और उनसे ज्ञान व सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं।
साल में मुख्य रूप से दो अवसरों पर सरस्वती पूजा की जाती है। पहली पूजा माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी बसंत पंचमी पर होती है। दूसरी पूजा शारदीय नवरात्रि के दौरान की जाती है।
अगर आप भी शारदीय नवरात्रि 2026 में मां सरस्वती की पूजा करना चाहते हैं, तो यहां जानिए पूजा की तारीख, शुभ मुहूर्त, घर पर पूजा करने की विधि और मंत्र।
कब है सरस्वती पूजा 2026?
पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के दौरान मां सरस्वती की पूजा के लिए ये प्रमुख तिथियां बताई गई हैं।
- सरस्वती आवाहन: 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- मुख्य सरस्वती पूजा: 17 अक्टूबर 2026, शनिवार
- सरस्वती बलिदान पूजा: 18 अक्टूबर 2026, रविवार
- सरस्वती विसर्जन: 19 अक्टूबर 2026, सोमवार
इन तिथियों पर अलग-अलग परंपराओं के अनुसार पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं।
सरस्वती पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
17 अक्टूबर 2026 को मां सरस्वती की पूजा के लिए दिए गए शुभ समय इस प्रकार हैं:
- सुबह का मुहूर्त: सुबह 6:22 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक
- दोपहर का मुहूर्त: दोपहर 3:54 बजे से शाम 6:14 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच पूजा की तैयारी करना और किताबों, कलम तथा वाद्य यंत्रों की पूजा करना शुभ माना जाता है।
नोट: पूजा का सटीक मुहूर्त स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है।
घर पर कैसे करें मां सरस्वती की पूजा?
मां सरस्वती की पूजा घर पर भी सरल तरीके से की जा सकती है। इसके लिए इन चरणों का पालन करें।
1. स्नान और साफ कपड़े पहनें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इस दिन पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
2. पूजा की चौकी सजाएं
एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर मां सरस्वती और भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
3. किताबों और कलम की पूजा करें
विद्यार्थी अपनी किताबें, कॉपियां और कलम मां के सामने रखें। संगीत से जुड़े लोग अपने वाद्य यंत्र भी पूजा में रख सकते हैं।
4. फूल और दीपक चढ़ाएं
मां सरस्वती को फूल, अक्षत, चंदन और धूप अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं।
5. मां को भोग लगाएं
मां सरस्वती को बूंदी के लड्डू, बेसन का हलवा, पीले फल या केसरिया खीर का भोग लगा सकते हैं।
6. आरती और मंत्र जाप करें
मां सरस्वती की आरती करें और ज्ञान व बुद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा के अंत में परिवार के सदस्यों को प्रसाद बांटें।
मां सरस्वती के मंत्र
सरस्वती पूजा के दिन मां के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
बीज मंत्र:
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का 108 बार जाप एकाग्रता और ज्ञान की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
मां सरस्वती की वंदना:
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
इस वंदना के जरिए मां सरस्वती से बुद्धि, ज्ञान और अज्ञान को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
सरस्वती पूजा का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि, एकाग्रता और वाणी की स्पष्टता का आशीर्वाद मिलता है। विद्यार्थी पढ़ाई में सफलता और शिक्षक बेहतर ज्ञान देने की क्षमता के लिए मां की आराधना करते हैं।
यह दिन छोटे बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने यानी विद्यारंभ संस्कार के लिए भी शुभ माना जाता है। कला, संगीत और साहित्य से जुड़े लोग भी अपनी कला में प्रगति की कामना करते हुए मां सरस्वती की पूजा करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक जानकारी मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। पूजा की तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अपने स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से कर लें।



