सावन में रुद्राक्ष पहनना क्यों माना जाता है शुभ?
हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। शिवपुराण, लिंगपुराण और स्कंद पुराण में रुद्राक्ष के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि रुद्राक्ष धारण करने, उसे स्पर्श करने या उस पर मंत्र जाप करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष भगवान शिव को सबसे प्रिय है। इसलिए सावन (श्रावण) के महीने में इसे धारण करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
कैसे हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के आंसुओं की बूंदें जब पृथ्वी पर गिरीं, तभी रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। इसी वजह से रुद्राक्ष का भगवान शिव से विशेष संबंध माना जाता है।
किसे कौन-सा रुद्राक्ष पहनना चाहिए?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर व्यक्ति अपनी जन्म कुंडली और लग्न के अनुसार रुद्राक्ष धारण करता है, तो उसे अधिक लाभ मिल सकता है। माना जाता है कि लग्नेश, पंचमेश और भाग्येश से जुड़े रुद्राक्ष पहनने से जीवन में तरक्की, सौभाग्य और सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बढ़ती है।
हालांकि, रुद्राक्ष धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषाचार्य या धर्म विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
- मेष लग्न के लिए एक मुखी, तीन मुखी एवं पांच मुखी रुद्राक्ष।
- वृष लग्न के लिए चार मुखी, छह मुखी एवं चौदह मुखी रुद्राक्ष।
- मिथुन लग्न के लिए चार मुखी, पांच मुखी एवं तेरह मुखी रुद्राक्ष।
- कर्क लग्न के लिए तीन मुखी, पांच मुखी एवं गौरीशंकर रुद्राक्ष।
- सिंह लग्न के लिए एक मुखी, तीन मुखी एवं पांच मुखी रुद्राक्ष।
- कन्या लग्न के लिए चार मुखी, पांच मुखी एवं तेरह मुखी रुद्राक्ष।
- तुला लग्न के लिए चार मुखी, छह मुखी एवं चौदह मुखी रुद्राक्ष।
- वृश्चिक लग्न के लिए तीन मुखी, पांच मुखी एवं गौरी शंकर रुद्राक्ष।
- धनु लग्न के लिए एक मुखी, तीन मुखी एवं पांच मुखी रुद्राक्ष।
- मकर लग्न के लिए चार मुखी, छह मुखी एवं चौदह मुखी रुद्राक्ष।
- कुम्भ लग्न के लिए चार मुखी, छह मुखी एवं चौदह मुखी रुद्राक्ष।
- मीन लग्न के लिए तीन मुखी, पांच मुखी एवं गौरी शंकर रुद्राक्ष।
यदि जन्मकुण्डली में मंगल, शनि, राहु, केतु अथवा सूर्य के कारण मंगली दोष बन रहा हो और दाम्पत्य जीवन तनावपूर्ण हो, तो गौरीशंकर रुद्राक्ष धारण करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। रुद्राक्ष धारण करने से जुड़े लाभ व्यक्ति की आस्था और परंपराओं पर निर्भर करते हैं।
किसी भी धार्मिक या ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
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