स्ट्रोक दुनिया में मौत और गंभीर विकलांगता का एक बड़ा कारण है। डॉक्टरों का कहना है कि स्ट्रोक के मामले में हर मिनट बहुत महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी मरीज को इलाज मिले, उसके ठीक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच स्ट्रोक का एक नया शुरुआती संकेत सामने आया है, जिसे डिस्टेक्स्टिया (Dystextia) कहा जाता है।
क्या है डिस्टेक्स्टिया?
डिस्टेक्स्टिया कोई अलग बीमारी नहीं है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अचानक फोन पर सही तरीके से मैसेज टाइप नहीं कर पाता। उसके मैसेज में गलत शब्द आने लगते हैं, वाक्य समझ में नहीं आते या टाइपिंग में असामान्य गलतियां होने लगती हैं। कई मामलों में यह स्ट्रोक का शुरुआती संकेत पाया गया है।
फ़रीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सौरभ सुल्तानिया के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति सामान्य रूप से टाइप करता है लेकिन अचानक सही शब्द लिखने में परेशानी होने लगे, शब्दों का क्रम बिगड़ जाए या अर्थहीन वाक्य बनने लगें, तो यह दिमाग के उस हिस्से के प्रभावित होने का संकेत हो सकता है, जो भाषा को नियंत्रित करता है।
ऐसी स्थिति में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से स्ट्रोक के गंभीर असर को कम किया जा सकता है।
क्या है डिस्टेक्स्टिया और स्ट्रोक का संबंध?
स्प्रिंगर नेचर की स्टडी के अनुसार स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह रुक जाता है या रक्त वाहिका फट जाती है। यदि यह हिस्सा भाषा या लिखने की क्षमता को नियंत्रित करने वाले क्षेत्र को प्रभावित करता है, तो व्यक्ति बोलने, पढ़ने या लिखने में कठिनाई महसूस कर सकता है।
आज लोग बातचीत का बड़ा हिस्सा मोबाइल पर टाइप करके करते हैं। इसलिए कई बार सबसे पहला बदलाव फोन पर भेजे गए मैसेज में दिखाई देता है। कुछ केस रिपोर्ट्स में मरीज ने अस्पताल पहुंचने से पहले अपने परिवार को ऐसे मैसेज भेजे जो व्याकरण और अर्थ दोनों के लिहाज से पूरी तरह असामान्य थे। बाद में जांच में उन्हें स्ट्रोक की पुष्टि हुई।
संकेत नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
- न्यूरोलॉजी जनरल के मुताबिक व्यक्ति जानने वाले शब्दों को भी बार-बार गलत लिखने लगता है।
- मैसेज पढ़ने पर शब्द तो होते हैं, लेकिन उनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं निकलता।
- यदि बिना किसी तकनीकी कारण के टाइपिंग में कठिनाई आने लगे।
स्ट्रोक का शुरुआती संकेत क्या है?
साइंस डायरेक्ट के अनुसार डिस्टेक्स्टिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज अधिकांश लोग फोन पर लगातार मैसेज करते हैं। ऐसे में लिखने की क्षमता में अचानक बदलाव सबसे पहले डिजिटल बातचीत में नजर आ सकता है।
हालांकि, केवल टाइपिंग में गलती होना स्ट्रोक का प्रमाण नहीं है। ऑटो-करेक्ट, जल्दबाजी या ध्यान भटकने से भी गलतियां हो सकती हैं। लेकिन यदि व्यक्ति पहले सामान्य रूप से टाइप करता था और अचानक लगातार असामान्य मैसेज भेजने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
स्ट्रोक के अन्य शुरुआती संकेत
मैयोक्लीनिक के मुताबिक डिस्टेक्स्टिया के साथ यदि ये लक्षण भी हों, तो तुरंत अस्पताल जाएं
- चेहरे का एक हिस्सा लटकना
- एक हाथ या पैर में कमजोरी
- बोलने में कठिनाई
- अचानक धुंधला दिखना
- संतुलन बिगड़ना
- तेज सिरदर्द
- भ्रम या समझने में कठिनाई
डिस्टेक्स्टिया आधुनिक डिजिटल युग में स्ट्रोक का एक संभावित शुरुआती संकेत माना जा रहा है। यह कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि मस्तिष्क के भाषा और लेखन से जुड़े हिस्से में आई समस्या का संकेत हो सकता है।
हालांकि केवल टाइपिंग में हुई एक-दो गलतियों से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि अचानक लगातार असामान्य मैसेज, बोलने में कठिनाई, चेहरे का टेढ़ा होना या हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षण साथ दिखाई दें, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी मानते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
