दिवाली का पांच दिवसीय त्योहार धनतेरस से शुरू होता है। इसके अगले दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जिसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं और यमराज की पूजा की जाती है। साथ ही सुबह के समय विशेष स्नान करने की परंपरा भी है।
साल 2026 में छोटी दिवाली की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि यह त्योहार 7 नवंबर को मनाया जाएगा या 8 नवंबर को। ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण अलग-अलग धार्मिक कार्यों के लिए दोनों दिन शुभ माने गए हैं। आइए जानते हैं छोटी दिवाली की सही तारीख, पूजा का समय और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
नरक चतुर्दशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह से शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी।
- चतुर्दशी तिथि शुरू: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:38 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:29 बजे
- दीपदान का शुभ समय: 7 नवंबर, शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक
- अभ्यंग स्नान का शुभ समय: 8 नवंबर, सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक
7 नवंबर को करें यम दीपदान और मां काली की पूजा
पंचांग के अनुसार, 7 नवंबर की शाम को चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसलिए इस दिन शाम के समय यमराज के नाम से दीपक जलाना शुभ माना गया है।
इसके अलावा इस दिन मां काली की पूजा और हनुमान जी की आराधना भी की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
8 नवंबर को करें रूप चौदस का स्नान
8 नवंबर की सुबह रूप चौदस और अभ्यंग स्नान की परंपरा निभाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर उबटन लगाकर स्नान किया जाता है।
मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर में निखार आता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
नरक चतुर्दशी पर क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती?
उत्तर भारत की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की आधी रात को भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। इसी वजह से इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है।
इस साल 7 नवंबर की रात चतुर्दशी तिथि मध्यरात्रि तक रहने के कारण उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार इसी दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। हालांकि, दक्षिण भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।
राजा बलि और भगवान वामन से जुड़ी है नरक चतुर्दशी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। वह 100 यज्ञ पूरे करके स्वर्ग का राजा बनना चाहते थे।
देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि से तीन पग जमीन दान में मांगी। राजा बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली।
इसके बाद भगवान वामन ने विशाल रूप धारण कर लिया। उन्होंने अपने दो कदमों में ही पूरी पृथ्वी और आकाश को नाप लिया। तीसरा कदम रखने के लिए जब कोई जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।
राजा बलि की दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। तब राजा बलि ने प्रार्थना की कि कार्तिक महीने की चतुर्दशी को जो भी व्यक्ति यमराज के नाम से दीपदान करेगा, उसे नरक की यातनाओं का सामना न करना पड़े।
भगवान विष्णु ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। तभी से नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा शुरू होने की मान्यता है।
रूप चौदस पर अभ्यंग स्नान का क्या है महत्व?
रूप चौदस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। इस दिन हल्दी, चंदन और सरसों या तिल के तेल से उबटन तैयार किया जाता है।
इसके बाद उबटन को शरीर पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश की जाती है और फिर स्नान किया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर की शुद्धि होती है, सुंदरता बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसे मनाई जाती है छोटी दिवाली?
भारत के अलग-अलग राज्यों में नरक चतुर्दशी मनाने की परंपरा थोड़ी अलग है।
- उत्तर भारत: छोटी दिवाली के रूप में घरों में दीपक जलाए जाते हैं और यमराज की पूजा होती है।
- गुजरात और महाराष्ट्र: इस दिन काली चौदस के रूप में मां काली की पूजा की जाती है।
- दक्षिण भारत: नरक चतुर्दशी पर सुबह तिल के तेल से स्नान करने की परंपरा है।
छोटी दिवाली की पूजा विधि
छोटी दिवाली के दिन पूजा करने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है।
- सुबह स्नान: सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल की सफाई: घर के पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें।
- देवी-देवताओं की पूजा: यमराज, भगवान श्रीकृष्ण, मां काली, भगवान शिव, हनुमान जी और वामन देव की पूजा करें।
- पूजा सामग्री: रोली, चंदन, अक्षत, फूल, धूप और दीपक अर्पित करें।
- आरती: पूजा के बाद कपूर जलाकर आरती करें।
- शाम को दीपदान: प्रदोष काल में घर के मुख्य दरवाजे के बाहर यमराज के नाम से दीपक जलाएं। इसके अलावा घर के कोनों और छत पर भी दीपक रखें।
मान्यता है कि छोटी दिवाली पर विधि-विधान से पूजा और दीपदान करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। शुभ मुहूर्त में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। पूजा-पाठ से जुड़ी परंपराओं का पालन अपनी मान्यता के अनुसार करें।



