अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहली आमने-सामने की बैठक होने जा रही है। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग तो बना हुआ है, लेकिन हाल के महीनों में कुछ मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक रिश्तों को और मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा पर साझा रणनीति तय करने के लिए बेहद अहम होगी।
बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा? – ईरान युद्ध के
व्हाइट हाउस में होने वाली इस बैठक में ईरान की परमाणु गतिविधियां, क्षेत्रीय सुरक्षा, गाजा की स्थिति, लेबनान सीमा पर तनाव और मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल के भविष्य के सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ईरान से जुड़े सुरक्षा इनपुट भी ट्रंप के साथ साझा कर सकते हैं।
क्यों मानी जा रही है यह मुलाकात खास? – ईरान युद्ध के

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली प्रत्यक्ष मुलाकात है। हाल के महीनों में दोनों नेताओं के बीच कुछ रणनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण की खबरें सामने आई थीं। अब यह मुलाकात उन मतभेदों को कम करने और साझा नीति बनाने का अवसर मानी जा रही है।
मध्य पूर्व की स्थिति पर रहेगा फोकस
बैठक में गाजा संघर्ष, लेबनान सीमा की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में तनाव कम हो, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे में दोनों देशों की रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
राजनीतिक रूप से भी अहम मुलाकात
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों नेताओं के लिए घरेलू राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। नेतन्याहू अपने देश में राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जबकि ट्रंप भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी विदेश नीति को मजबूत दिखाना चाहते हैं।
क्या निकल सकता है नतीजा?
विश्लेषकों का मानना है कि बैठक के बाद ईरान, गाजा और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कोई संयुक्त रणनीति या साझा बयान सामने आ सकता है। हालांकि किसी बड़े समझौते की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
निष्कर्ष – ईरान
ईरान युद्ध के बाद ट्रंप और नेतन्याहू की यह पहली मुलाकात सिर्फ अमेरिका और इजरायल के रिश्तों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक से निकलने वाले फैसलों का असर आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
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