गणेश चतुर्थी पर घर में भगवान गणेश की स्थापना करना शुभ माना जाता है। परंपरागत पूजा में सिर्फ गणेश जी की मूर्ति स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। सबसे पहले पूजा स्थान की सफाई और शुद्धि की जाती है। इसके बाद आसन, कलश पूजन और संकल्प की प्रक्रिया होती है। फिर भगवान गणेश का आवाहन और पूजन किया जाता है।
पूजा में कलश का भी विशेष महत्व बताया गया है। इसे देवताओं और पवित्र नदियों के आवाहन का आधार माना जाता है। इसलिए गणेश स्थापना के समय कलश को सही तरीके से तैयार करना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कलश में क्या रखें?
गणेश स्थापना के लिए साफ तांबे, पीतल या किसी अन्य शुद्ध पात्र का कलश लें। इसमें साफ पानी भरें। इसके बाद कलश में अक्षत, सुपारी, दूर्वा और एक सिक्का रखा जा सकता है।
कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और उनके ऊपर नारियल स्थापित करें। नारियल को लाल कपड़े या मौली से बांधकर रखा जाता है।
सबसे पहले पूजा स्थान तैयार करें
गणेश जी की स्थापना से पहले घर और पूजा की जगह की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं।
मूर्ति रखने के लिए चौकी पर अक्षत यानी चावल की छोटी-सी वेदी बनाई जा सकती है।
कलश की स्थापना करें
गणेश जी की मूर्ति के पास कलश स्थापित करें। कलश पर गंध, अक्षत और फूल चढ़ाकर उसका पूजन करें। इसके बाद परंपरा के अनुसार कलश में देवताओं और पवित्र नदियों का आवाहन किया जाता है।
पूजा का संकल्प लें
इसके बाद आचमन करके देश और काल का स्मरण करते हुए भगवान गणेश की पूजा का संकल्प लें। संकल्प में परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की जाती है।
अब करें गणपति की स्थापना
भगवान गणेश की मूर्ति को स्वच्छ चौकी पर अक्षत के ऊपर स्थापित करें। मूर्ति स्थापित करते समय गणपति का आवाहन करें।
वैदिक परंपरा में गणपति के आवाहन के लिए ऋग्वेद का यह मंत्र पढ़ा जाता है:
“गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥”
प्राणप्रतिष्ठा के बाद करें पूजा
इसके बाद परंपरागत विधि के अनुसार भगवान गणेश की प्राणप्रतिष्ठा और पूजा की जाती है। इसमें आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं।
दूर्वा और मोदक जरूर चढ़ाएं
भगवान गणेश को दूर्वा, लाल फूल और मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ किया जा सकता है।
आखिर में करें गणेश जी की आरती
पूजा पूरी होने के बाद भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य भगवान से बुद्धि, विवेक, सुख और मंगल की प्रार्थना करें।
गणेश स्थापना के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- गणेश स्थापना के लिए स्थानीय पंचांग में बताए गए मध्याह्न मुहूर्त को महत्व दिया जाता है।
- गणपति की स्थापना के दौरान घर का माहौल शांत और भक्तिमय रखें।
- गणेश जी के घर आने के बाद पूजा स्थल और घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करने और लहसुन-प्याज से बना भोजन न करने की परंपरा है।
- कलश में रखी सामग्री को पूजा समाप्त होने पर विधि के अनुसार विसर्जित करें। इसे इधर-उधर फेंकने से बचें।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
दिए गए पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी की मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। इसी अवधि को गणेश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त माना गया है।
वहीं, हरतालिका तीज की पूजा का समय सुबह करीब 6:03 बजे से 8:27 बजे तक बताया गया है।
डिस्क्लेमर
यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। NAV24news किसी भी मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी धार्मिक विधि या मान्यता को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या पंडित से सलाह जरूर लें।
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