अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को लेकर क्या बोले लावरोव?
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अफगानिस्तान और उसके आसपास NATO के सैन्य ढांचे की संभावित तैनाती को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मॉस्को किसी भी बहाने से अफगानिस्तान या उसके पड़ोसी देशों में NATO की सैन्य मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेगा।
लावरोव ने कहा कि इस तरह की सैन्य तैनाती से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को लेकर क्या बोले लावरोव?
सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को मॉस्को में अफगानिस्तान पर 8वें मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशंस की बैठक हुई। इस दौरान लावरोव ने तालिबान सरकार की स्थिति पर भी बात की।
उन्होंने कहा कि तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सरकार देश में प्रभावी तरीके से शासन कर रही है। उनके मुताबिक, तालिबान ने देश के लगभग पूरे हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देशों की करीब दो दशक लंबी मौजूदगी खत्म होने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व में नई सरकार सत्ता में आई और अब वह देश चला रही है।
ISIS और दूसरे आतंकी संगठनों से लड़ रहे अफगानिस्तान के सुरक्षा बल
लावरोव ने दावा किया कि अफगान सुरक्षा बल ISIS और अन्य आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अफगान सुरक्षा बलों ने कई आतंकवादियों को मार गिराया है और कई बड़े हमलों को नाकाम किया है।
उन्होंने कहा कि काबुल की आतंकवाद विरोधी क्षमता को मजबूत करना सभी देशों के हित में है। इसके लिए लॉजिस्टिक और विशेषज्ञ सहायता देने के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों के बीच संपर्क बनाए रखना जरूरी है।
अफीम उत्पादन में 90 फीसदी गिरावट का दावा
लावरोव ने अफगानिस्तान में ड्रग्स के खिलाफ तालिबान सरकार की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2022 के बाद से अफगानिस्तान में अफीम का उत्पादन करीब 90 फीसदी कम हुआ है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में कुछ क्षेत्रों में विकास हुआ है।
लावरोव के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब तक करीब 170 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू हो चुकी हैं और पिछले साल देश का विदेशी व्यापार करीब 14 अरब डॉलर रहा।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
रूस का साफ संदेश
लावरोव के बयान से साफ है कि रूस अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी देशों में NATO की सैन्य मौजूदगी के खिलाफ है। मॉस्को का मानना है कि बाहरी सैन्य ढांचे की तैनाती से क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता बढ़ सकती है।
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