दुनिया की पहली अनोखी रोबोटिक हार्ट सर्जरी सफल
दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बड़ी मेडिकल उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने दुनिया में पहली बार एक बेहद दुर्लभ और जटिल रोबोटिक हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इस उपलब्धि से भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन हुआ है।

मरीज को क्या समस्या थी?
डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज का दिल जन्म से ही सामान्य लोगों की तरह नहीं था। उसका दिल छाती के बाईं ओर नहीं, बल्कि दाईं ओर था। इस दुर्लभ स्थिति को डेक्स्ट्रोकार्डिया कहा जाता है, जो लाखों लोगों में किसी एक को होती है।
इसके अलावा मरीज को एक और जन्मजात बीमारी थी, जिसमें दिल की अंदरूनी बनावट सामान्य से अलग थी। इसकी वजह से दिल का एक हिस्सा गलत तरीके से खून पंप कर रहा था, जिससे दिल पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था।
दिल का वाल्व पूरी तरह खराब हो गया था
इन दोनों समस्याओं के कारण मरीज का एवी वाल्व पूरी तरह खराब हो चुका था। दिल का वाल्व एक दरवाजे की तरह काम करता है, जो खून के सही प्रवाह को बनाए रखता है। वाल्व खराब होने से मरीज के दिल की ताकत लगातार कम होती जा रही थी और उसकी जान को खतरा बढ़ गया था।
ऐसी जटिल स्थिति में डॉक्टरों ने रोबोटिक तकनीक की मदद से सफल सर्जरी कर मरीज को नई जिंदगी दी।
डॉक्टरों के सामने क्या थी चुनौती?
- मरीज का दिल दाईं तरफ था और दिल के अंदर की नसें भी उल्टी जुड़ी हुई थीं, इसलिए पुराने तरीके से छाती चीरकर सर्जरी करना बहुत खतरनाक हो सकता था. डॉ. अनुभव गुप्ता और उनकी टीम ने इस मुश्किल को हल करने के लिए आधुनिक रोबोटिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया. आम तौर पर जब रोबोट से हार्ट सर्जरी की जाती है तो मशीन को छाती के दाईं तरफ से शरीर में डाला जाता है, क्योंकि दिल बाईं तरफ होता है. वहीं, इस मरीज का दिल तो पहले से ही दाईं तरफ था. ऐसे में डॉक्टरों ने बिल्कुल नया तरीका खोजा.
कैसे हुई यह जादुई सर्जरी?
ऑपरेशन थिएटर में जाने से पहले डॉक्टरों ने पूरी तैयारी की. - सीटी स्कैन और 3डी तस्वीरें: सबसे पहले मरीज के दिल का सीटी स्कैन किया गया. फिर कंप्यूटर की मदद से उसकी एक 3डी तस्वीर बनाई गई. इससे डॉक्टरों को मरीज के उल्टे दिल की एकदम सटीक जानकारी मिल गई कि कौन-सी नस कहां है.
- बिना हड्डी काटे ऑपरेशन: यह ऑपरेशन पुराने तरीके से नहीं किया गया, जिसमें छाती की हड्डी को बीच से काटा जाता है. इसके बजाय डॉक्टरों ने मरीज की छाती पर केवल कुछ छोटे-छोटे छेद किए.
- रोबोट का कमाल: इन्हीं छेदों के जरिए रोबोट के पतले उपकरणों को शरीर के अंदर डाला गया. एक हाई-डेफिनिशन 3डी कैमरे की मदद से डॉक्टरों को बाहर स्क्रीन पर दिल की बहुत बड़ी और साफ तस्वीर दिख रही थी. डॉक्टर बाहर बैठे-बैठे रोबोट को निर्देश दे रहे थे और रोबोट अंदर दिल का खराब वाल्व निकालकर उसकी जगह नया वाल्व लगा रहा था.
रोबोटिक सर्जरी से मरीज को क्या फायदे हुए? - हड्डी न काटने से मरीज को भयंकर दर्द से छुटकारा मिल गया.
- छोटे कट लगने के कारण मरीज का खून बहुत कम बहा.
- बड़े घाव न होने की वजह से इंफेक्शन का खतरा लगभग खत्म हो गया.
- घाव छोटा होने के कारण मरीज बहुत जल्दी स्वस्थ होकर अपने घर जा सकेगा.
बता दें कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि सफदरजंग अस्पताल की डायरेक्टर डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में हासिल हुई. सीटीवीएस विभाग के प्रमुख प्रोफेसर (डॉ.) अनुभव गुप्ता के अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक रोबोटिक तकनीक के सही इस्तेमाल से इस असंभव लगने वाले काम को संभव कर दिखाया.
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