वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप से अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. विनाशकारी भूकंप के मलबे के बीच जहां चारों ओर सिर्फ मौत और तबाही का मंजर था वहां बचाव दल के सामने एक ऐसा वाकया हुआ जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. कराकस शहर की सड़क पर मलबे के नीचे दबी एक गर्भवती महिला को लेबर पेन शुरू हो गया और उसने मलबे के अंदर ही एक बच्चे को जन्म दिया.

मां और नवजात बच्चा अस्पताल में भर्ती
चारों तरफ कंक्रीट और तबाही होने के बावजूद, मां और नवजात बच्चा दोनों सुरक्षित बच गए. बचाव दल ने मौके पर ही उन्हें जरूरी मेडिकल मदद दी और फिर सावधानी से अस्पताल पहुंचाया, जहां दोनों का इलाज चल रहा है. इस चमत्कारिक घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं .
इस भीषण भूकंप ने वेनेजुएला में भारी तबाही मचाई है. सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और पूरा इलाका मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है. ला गुएरा और कराकस समेत कई राज्यों में सैकड़ों इमारतें ढह चुकी हैं और सड़कें टूट गई हैं.
भूकंप से वेनेजुएला में भारी नुकसान
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे’ के अनुमान के मुताबिक, इस आपदा से वेनेजुएला को अपनी जीडीपी के लगभग 7% के बराबर का बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने मानवीय सहायता और आपदा राहत के तहत ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ शुरू किया है. इस अभियान के जरिए भारत ने प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की पहल की है. इसके लिए भारतीय सेना की एक स्पेशल मेडिकल यूनिट को वेनेजुएला रवाना किया गया है.
भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल से 41 सदस्यीय दल, भारतीय वायुसेना के दो विमानों से वेनेजुएला के लिए रवाना हुआ है. इनमें नौ अनुभवी सैन्य चिकित्सक भी शामिल हैं. यह यूनिट वेनेजुएला के आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, गंभीर रूप से घायल लोगों का उपचार, सर्जरी, ट्रॉमा प्रबंधन तथा प्रभावित लोगों को गहन चिकित्सा प्रदान करेगा.
वेनेजुएला के लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत इस संकट में मदद के लिए मौजूद है; हम आपके साथ हैं. ऑपरेशन अमिस्ताद भारत की उस मानवीय सोच को भी दर्शाता है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात ‘पूरा विश्व एक परिवार है’ के सिद्धांत पर आधारित है. प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के दौरान सहायता पहुंचाने की भारत की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह अभियान वैश्विक मानवता, करुणा और सहयोग के प्रति देश की प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण बन गया है.
