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Sat. Jun 20th, 2026

अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा आस्था और भक्ति के साथ अर्पित की गई धनराशि को ‘चंदा’ कहना उचित नहीं है और इससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। विहिप ने राम मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी या चोरी के आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि बिना तथ्यों के ऐसे आरोप समाज में भ्रम फैलाने का काम करते हैं।

विहिप की यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अयोध्या को बदनाम करने और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल खड़े करने की कोशिश की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आएगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बात अयोध्या स्थित श्री मणिराम दास छावनी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही. यह कार्यक्रम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के 88वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था. विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कुछ लोग बिना किसी ठोस सबूत के दान राशि की चोरी के “निराधार और तथ्यहीन” आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने मांग की कि एसआईटी ऐसे लोगों को नोटिस जारी करे और उनसे उनके आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे.

समाज में भ्रम फैलाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम हो रहा

विनोद बंसल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एसआईटी को ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करनी चाहिए, जो हिंदू भावनाएं भड़काने और श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप समाज में भ्रम फैलाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम कर रहे हैं.

विहिप प्रवक्ता ने कहा कि ‘चंदा’ शब्द का हिंदू आस्था और धार्मिक परंपराओं में कोई स्थान नहीं है. मंदिरों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास से दान अर्पित करते हैं, इसलिए उसे ‘चंदा’ कहना उचित नहीं है. विनोद बंसल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास राम मंदिर में चढ़ाई गई दान राशि के कथित दुरुपयोग या चोरी से जुड़े कोई तथ्य या सबूत हैं, तो उन्हें तुरंत एसआईटी को सौंपना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच में सहयोग मिल सके.

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