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Sun. Jun 28th, 2026

देशभर में मानसून की रफ्तार अब भी धीमी बनी हुई है। शनिवार तक सामान्य के मुकाबले 43% कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि अगले महीने तक मानसून पूरे देश में फैल जाएगा, लेकिन इस बार सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बनी हुई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो के प्रभाव और भारतीय महासागर डाइपोल (IOD) के तटस्थ रहने की वजह से इस मानसून सीजन में कुल वर्षा सामान्य से 10% से अधिक कम हो सकती है। इससे कई राज्यों में बारिश की कमी बनी रहने की संभावना है।

IOD तटस्थ बना हुआ है

एल नीनो के प्रभाव को आमतौर पर पॉजिटिव IOD कम करता है, जिससे कई बार कमजोर मानसून वाले वर्षों में भी सामान्य बारिश हो जाती है। 2023 इसका उदाहरण है, जब पॉजिटिव IOD ने मजबूत एल नीनो के बावजूद देश को लगभग सामान्य बारिश दी। लेकिन इस बार IOD तटस्थ (neutral) बना हुआ है।

मौसम मिशन कूपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के पूर्वानुमान के अनुसार पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में यही स्थिति बनी रहने की संभावना है। तटस्थ IOD न तो मानसून को मजबूत करता है और न ही कमजोर, जिससे एल नीनो जैसे अन्य कारक ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं।

IMD ने पहले ही इस मानसून सीजन (जून-सितंबर) के लिए ‘नीचे सामान्य’ बारिश की भविष्यवाणी की है। इसमें 60% संभावना जताई गई है कि बारिश 10% से ज्यादा घाटे वाली रहेगी, जिससे सूखे की आशंका बढ़ गई है।

दिल्ली में गर्मी का सितम

दिल्लीवासियों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार दोपहर 2:30 बजे ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस मौसम का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड है। इससे पहले 10 जून और 28 मई को 48.2 डिग्री सेल्सियस रहा था।

अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4 डिग्री ज्यादा है। दोपहर 2:30 बजे नमी 45% थी। मौसम विभाग के अधिकारी ने बताया कि ऊंची नमी के कारण फील्स लाइक तापमान 50 डिग्री के पार चला गया।

एल नीनो का प्रभाव और बढ़ सकता है

1 जून से 27 जून तक के आंकड़ों के अनुसार कई राज्यों में भारी कमी दर्ज की गई है। मेगालय में सबसे ज्यादा 82% घाटा है, इसके बाद गुजरात (79%), मणिपुर (71%), छत्तीसगढ़ (68%), झारखंड (66%), महाराष्ट्र (59%), उत्तर प्रदेश (56%), ओडिशा (52%) और बिहार (50%) शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में 41% कमी है, जो चिंता का विषय है क्योंकि यह मानसून कोर जोन में आता है और कृषि मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है। दक्षिण भारत में (आंध्र प्रदेश को छोड़कर) कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में 30% से ज्यादा घाटा है, हालांकि इन राज्यों में मानसून 2-3 हफ्ते पहले पहुंच चुका है।

चार समरूप क्षेत्रों के आंकड़ों में मध्य भारत में सबसे ज्यादा 57% कमी है, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 44%, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 30% और उत्तर-पश्चिम भारत में 27% कमी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि IOD पॉजिटिव नहीं होता तो एल नीनो का प्रभाव कृषि, जलाशयों और समग्र अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।

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