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अमेरिका ने दावा किया है कि इस सप्ताह उसने समुद्री ड्रोन (USV) का इस्तेमाल करते हुए ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर बड़ा हमला कियाअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 13 जुलाई को तीन मानव रहित समुद्री ड्रोन ने पनडुब्बी और जहाजों के रखरखाव केंद्र को निशाना बनाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार है जब अमेरिका ने युद्ध में इस तरह के वन-वे अटैक समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया है। बताया गया है कि इस अभियान में लड़ाकू विमानों के साथ समुद्री ड्रोन का भी उपयोग किया गया, जिनका लक्ष्य ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और नौसैनिक ठिकानों को नुकसान पहुंचाना था।

‘सारोनिक कोर्सेर’ समुद्री ड्रोन क्या होता है?

  • USV पानी की सतह पर चलने वाली ऐसी नावें या जहाज होते हैं जिनमें कोई इंसानी क्रू यानि नाविक या कैप्टन सवार नहीं होता। जिस तरह हवा में उड़ने वाले ड्रोन्स (UAVs) होते हैं ठीक उसी तरह ये पानी की सतह पर काम करने वाले ड्रोन्स हैं।
  • इन्हें मीलों दूर बेस या किसी बड़े नौसैनिक जहाज पर बैठे ऑपरेटर्स सैटेलाइट या रेडियो लिंक के जरिए नियंत्रित करते हैं। आधुनिक USVs में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेंसर्स लगे होते हैं।
  • ‘सारोनिक कोर्सेर’ 24 फुट का USV है जिसकी पेलोड क्षमता 1,000 पाउंड है और इसका रेंज 1,000 नॉटिकल मील से ज्यादा है। इसकी स्पीड 35 नॉट से ज्यादा है।
  • सारोनिक इसे एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर बेचता है जिसे आसानी से बदला या नष्ट किया जा सकता है जो नेटवर्क से जुड़ा है और जिसे जरूरत के हिसाब से कॉन्फ़िगर किया जा सकता है।
  • यह इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही (ISR), समुद्री सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) और हमले के कामों के लिए उपयुक्त है।


    बंदर अब्बास स्ट्राइक से सबक

    बंदर अब्बास हमला यह दिखाता है कि एक छोटी, सस्ती नाव किसी सुरक्षित लक्ष्य की सुरक्षा घेरे को पार कर सकती है और बिना अपने क्रू को खतरे में डाले या ऑपरेशन में किसी बड़े युद्धपोत को जोखिम में डाले। ये काफी घातक साबित हो सकते हैं। दिसंबर 2025 में सारोनिक को अमेरिकी नौसेना से 392 मिलियन डॉलर का प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला था और इसके बाद अमेरिकी सेना ने निगरानी और सुरक्षा मिशन के लिए कोर्सेर को मध्य पूर्व में तैनात किया।



    पाकिस्तान भी बना रहा ‘समुद्री ड्रोन’

    पाकिस्तान भी अपनी नौसेना के लिए USV और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) विकसित कर रहा है। हालांकि उसके प्रोडक्शन क्षमता और उनके ऑपरेशनल भूमिका को लेकर गंभीर सवाल हैं। quwa की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अपनी नौसेना के लिए ऐसे ही छोटे, कम लागत वाले रिमोट-कंट्रोल सी-ड्रोन्स (USVs) और अंडरवाटर व्हीकल्स (AUVs) बना रहा है ताकि अरब सागर में भारतीय नौसेना या किसी अन्य चुनौती के खिलाफ कम खर्च में तटीय घेराबंदी की जा सके। हालांकि वो अपनी क्षमता किस हद तक विकसित कर चुका है इसकी जानकारी पता नहीं है।

    पाकिस्तान की चिंता क्या है?

    पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि कल को कोई दुश्मन देश पाकिस्तान के मुख्य बंदरगाहों कराची या ग्वादर पोर्टपर इसी तरह के घातक सी-ड्रोन्स से हमला कर दे तो पाकिस्तान उसे कैसे रोकेगा? बंदर अब्बास पर ईरान की नाकामी यह दिखाती है कि पारंपरिक तटीय सुरक्षा इन छोटे ड्रोन्स को रोकने में नाकाम रह सकती है। इसके अलावा पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि नौसेना में सी-ड्रोन्स शामिल कर लेना एक बात है लेकिन वास्तविक युद्ध में उनका सही तालमेल बिठाना और खुद को वैसे ही हमलों से बचाना दूसरी और बहुत कठिन बात है।

    quwa पर पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने कहा कि अगर दुश्मन देश जैसे भारतीय नौसेना ने युद्ध के दौरान GPS जैमिंग कर दी या पाकिस्तान के कमांड सेंटर और ड्रोन्स के बीच का कम्युनिकेशन लिंक काट दिया तो ये करोड़ों के ड्रोन्स पानी में अंधे और बेकार हो जाएंगे। पाकिस्तान इस जैमिंग से निपटने के लिए इन ड्रोन्स को कितना सुरक्षित बना सकता है? ये सबसे बड़ा सवाल है।


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