शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा आमरण अनशन आज 17वें दिन में पहुंच गया है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि लंबे समय से अनशन पर रहने की वजह से वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है।
उन्होंने कहा कि वांगचुक की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, उन्हें तेज दर्द हो रहा है और उनका वजन करीब 8.5 किलोग्राम कम हो गया है। उनका ब्लड प्रेशर 109/70 बताया गया है। अभिजीत दीपके ने वांगचुक से बातचीत के बाद उनसे अनशन खत्म करने की भी अपील की है।
वांगचुक की तबीयत बिगड़ी
अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा, ‘उनकी मांसपेशियां कमजोर होने लगी हैं और उन्हें असहनीय दर्द हो रहा है. बाकी सब लोगों की तरह मैंने भी उनसे अनशन तोड़ने की गुहार लगाई. उन्होंने शांत भाव से जवाब दिया कि मुझसे अनशन तोड़ने के लिए मत कहो. सरकार से पूछो कि वे बातचीत शुरू क्यों नहीं कर रहे.’
उन्होंने सरकार से यह भी अपील की कि इस विरोध प्रदर्शन को अहंकार की लड़ाई में न बदलें, क्योंकि इसमें मानवीय जीवन दांव पर लगे हैं. उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन केवल जवाबदेही की मांग करता है. गलती स्वीकार करना कमजोरी की निशानी नहीं है. यह परिपक्वता, जवाबदेही और सुधार की इच्छा का प्रतीक है.

सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी को नेताओं का भी समर्थन मिला है. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे, सीपीआई सांसद अमराराम, दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी ने जंतर-मंतर का प्रदर्शन किया है. महुआ मोइत्रा ने तो वांगचुक से भूख हड़ताल को खत्म करने और विरोध प्रदर्शन जारी करने की अपील की है.
महुआ मोइत्रा ने वांगचुक से की ये मांग
टीएमसी सांसद ने एक्स पर लिखा, ‘सोनम सर, आपके अनशन ने न्याय की लड़ाई में देश के युवाओं को एकजुट कर दिया है. आपका लक्ष्य पूरा हो गया है. सरकार को आपकी या करोड़ों युवाओं की जान की कोई परवाह नहीं है, लेकिन आपकी जान हमारे लिए मायने रखती है. कृपया अनशन समाप्त करें और लड़ाई जारी रखें.’

उद्धव ठाकरे ने दिया समर्थन
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी संगठन और उसके उद्देश्य को अपना समर्थन दिया. X पर एक पोस्ट में ठाकरे ने कहा, ‘हम शिवसेना की ओर से सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के आंदोलन को अपना समर्थन देते हैं.’ शिवसेना यूबीटी चीफ ने भी वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल वापस लेने की अपील की.
कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर 20 जून को शुरू हुआ था, जबकि वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.
