दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने थाली-चम्मच बजाकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताया और ‘गो प्रधान गो’ के नारे लगाए। इस दौरान पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराया।
प्रदर्शन में पेपर लीक के मामलों, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रों की आत्महत्या जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। पार्टी नेताओं का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। 6 जून को हुए प्रदर्शन के बाद इसे CJP का दूसरा बड़ा राष्ट्रीय स्तर का विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।
थाली-चम्मच क्यों बजाया गया?
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों से पहले ही अपील की थी कि वे थाली और चम्मच लेकर आएं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में दावा किया कि यूनेस्को के एक कथित शोध के अनुसार थाली-चम्मच से निकलने वाली तरंगें बड़े बदलाव ला सकती हैं, ठीक वैसे ही जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान थाली बजाने की अपील की गई थी। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए संगठन ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की।
दिल्ली के अलावा पुणे, लखनऊ, अमृतसर, बेंगलुरु, हैदराबाद और जयपुर समेत कई शहरों में भी CJP समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया के जरिए तेजी से लोकप्रिय हुए इस संगठन ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और छात्रों के हितों की रक्षा को लेकर देशव्यापी अभियान शुरू किया है।

PM मोदी से 1 करोड़ मुआवजे की मांग
अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर परीक्षा विवादों के बीच आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। दीपके का दावा है कि हाल के सप्ताहों में परीक्षा संबंधी विवादों के कारण 11 छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने पत्र में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की भी मांग दोहराई।
दीपके ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले एक महीने से लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है और देशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि छात्रों की मौतों और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं पर सरकार को जवाब देना चाहिए। CJP का दावा है कि उनका आंदोलन केवल छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर है।
