गणेश चतुर्थी से पहले आने वाली संकष्टी चतुर्थी इस बार खास मानी जा रही है. इस दिन भगवान गणेश के हेरंब स्वरूप की पूजा की जाएगी. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में हेरंब संकष्टी चतुर्थी 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी.
यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार हेरंब गणपति भगवान गणेश के 32 प्रमुख स्वरूपों में से एक हैं. उन्हें खास तौर पर कमजोर और असहाय लोगों की रक्षा करने वाला स्वरूप माना जाता है.
पांच मुख वाले हेरंब गणपति का क्या है महत्व?
हेरंब गणपति का स्वरूप सामान्य गणेश जी से अलग होता है. उनके पांच मुख और दस भुजाएं होती हैं. धार्मिक मान्यताओं में पांच मुखों को अलग-अलग शक्तियों का प्रतीक माना जाता है, जबकि दस भुजाएं उनकी शक्ति और सामर्थ्य को दर्शाती हैं.
हेरंब गणपति को सिंह पर सवार दिखाया जाता है. सिंह उनकी निडरता, साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है.
धार्मिक परंपरा में हेरंब नाम का संबंध असहाय लोगों की रक्षा से बताया गया है. इसलिए उनकी पूजा मुश्किल परिस्थितियों से निकलने और सुरक्षा की कामना के लिए की जाती है.
कब है हेरंब संकष्टी चतुर्थी?
पंचांग के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. चतुर्थी तिथि 31 अगस्त की सुबह 8:50 बजे शुरू होगी.
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा के दर्शन और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन चंद्रोदय करीब रात 8:27 बजे होने की जानकारी दी गई है. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा.
कैसे करें हेरंब गणपति की पूजा?
संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धालु सूर्योदय से व्रत रख सकते हैं. शाम के समय भगवान गणेश की पूजा की जाती है.
पूजा में गणेश जी को दूर्वा, मोदक, फल और फूल अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है.
हेरंब गणपति की पूजा से क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हेरंब गणपति की पूजा करने से जीवन की मुश्किलों और बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है. इस पूजा को सुरक्षा, साहस और कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने की कामना से भी जोड़ा जाता है.
हेरंब संकष्टी से जुड़ी एक धार्मिक कथा में दमयंती का भी उल्लेख मिलता है. मान्यता के अनुसार, महर्षि शरभंग के निर्देश पर दमयंती ने यह व्रत किया था और उन्हें इसका फल मिला.
इसी वजह से हेरंब संकष्टी चतुर्थी को मुश्किल समय में आशा, सुरक्षा और बाधाओं से मुक्ति से जोड़कर देखा जाता है.
FAQ
1. हेरंब गणपति को पांच मुख वाला गणेश क्यों कहा जाता है?
हेरंब गणपति के पांच मुख होते हैं और उन्हें दस भुजाओं वाले स्वरूप में दर्शाया जाता है. पांच मुख वाले इस स्वरूप को भगवान गणेश की विशेष शक्ति और रक्षक भाव से जोड़ा जाता है. सिंह पर सवार हेरंब गणपति निर्भयता और सामर्थ्य के प्रतीक माने जाते हैं.
2. हेरंब गणपति की पूजा करने से क्या लाभ मिलता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार हेरंब गणपति की पूजा संकट, भय और कठिन परिस्थितियों से रक्षा की कामना के लिए की जाती है. विशेष रूप से कमजोर और असहाय लोगों के रक्षक के रूप में उनके इस स्वरूप की उपासना का महत्व बताया गया है.
3. हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य देना क्यों जरूरी माना जाता है?
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व है. व्रती भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन करते हैं और अर्घ्य देते हैं. इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है. इसलिए इस दिन चंद्रोदय का समय जानना जरूरी होता है.
4. हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर कौन-सी पूजा सामग्री गणेश जी को चढ़ाएं?
इस दिन भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, फल और फूल अर्पित किए जा सकते हैं. श्रद्धा के अनुसार गणेश जी का पूजन कर उनकी आरती और मंत्र जाप किया जाता है. इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने की परंपरा है.
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