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Tue. Jun 30th, 2026

बांग्लादेश में चीन की बढ़ती गतिविधियों को भारत के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। हाल ही में दोनों देशों ने तीस्ता नदी परियोजना पर साथ काम करने का फैसला किया है। इसके अलावा चीन बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के विकास में भी सहयोग करेगा। माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र में चीन की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत होगी। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चीन की पहुंच सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के करीब बढ़ती है, तो यह भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है।

मोंगला पोर्ट को लेकर चिंता जताई गई

सैन्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि चीन, बांग्लादेश में आर्थिक, लॉजिस्टिक्स और रक्षा साझेदारियों का एक नेटवर्क तैयार कर रहा है, जो बंगाल की खाड़ी और भारत की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा के हालात बदल सकता है। एक बड़ी चिंता की बात यह है कि बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट पर 110 एकड़ का इकोनॉमिक जोन चीन की सरकारी कंपनी को देने का फैसला किया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, यह जगह मूल रूप से 2015 के द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत को दी गई थी।

मोंगला पोर्ट को लेकर चिंता जताई है कि चीन बांग्लादेश में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की क्षमताएं स्थापित कर सकता है। सूत्रों का कहना है कि चीन ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर (ESM) सिस्टम तैनात कर सकता है जो पश्चिम बंगाल के सुकना में स्थित भारतीय सेना की 33 कोर से निकलने वाले रेडियो, माइक्रोवेव और रडार सिग्नल को इंटरसेप्ट और एनालाइज करने में सक्षम हों। उनका यह भी दावा है कि मोंगला और चटगांव में चीन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर से एक “स्थायी रडार और सोनार ट्रैप” बन सकता है, जिससे बंगाल की खाड़ी में भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियाों और आवाजाही को खतरा हो सकता है।

चीन-बांग्लादेश समझौतों के बारे में जानें

  • प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बीजिंग दौरे पर चीन और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए 13 महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।
  • इन समझौतों में बंदरगाह के विकास, बांग्लादेश के बुनियादी ढांचा में निवेश, मीडिया सहयोग और राजनीतिक स्तर के करार शामिल हैं।
  • चीन बांग्लादेश के रणनीतिक रूप से अहम ‘मोंगला पोर्ट’ (बागेरहाट) को विकसित करेगा और इसके लिए फंडिंग भी उपलब्ध कराएगा।
  • चटगांव के के अनवारा और बागेरहाट के मोंगला के आर्थिक क्षेत्रों में चीनी निवेश को बढ़ावा देने के लिए समझौता हुआ है।
  • चीन बांग्लादेश की नदी प्रणालियों, विशेष रूप से तीस्ता नदी परियोजना और बाढ़ नियंत्रण प्रबंधन के लिए तकनीकी सहयोग देगा।
  • बांग्लादेश के स्कूली पाठ्यक्रम में मंदारिन (चीनी) भाषा की शिक्षा शुरू करने और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ाने के लिए करार हुआ है।

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