देश के बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक ने अपने नेतृत्व में अहम बदलाव किया है। बैंक के बोर्ड ने पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को पार्ट-टाइम चेयरमैन और अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने का फैसला लिया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति RBI और बैंक के शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद ही लागू होगी। बैंक का कहना है कि राजीव कुमार का प्रशासन और वित्त क्षेत्र का लंबा अनुभव भविष्य की रणनीति को मजबूत बनाने में मदद करेगा।
राजीव कुमार को अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक नियुक्त
एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने 29 जून को हुई बैठक में राजीव कुमार को चार साल के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया। वहीं, RBI की मंजूरी मिलने के बाद उन्हें तीन साल के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन बनाया जाएगा। बैंक ने इस फैसले के बाद अपनी 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के नोटिस में भी जरूरी बदलाव किए हैं।
राजीव कुमार IAS के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं
राजीव कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। उनके पास सार्वजनिक नीति, वित्तीय सुधार और प्रशासन का चार दशक से अधिक का अनुभव है। वर्ष 2017 से 2020 के बीच उन्होंने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने सरकारी बैंकों के पुनर्पूंजीकरण, विलय और बैंकिंग व्यवस्था में कई बड़े सुधारों का नेतृत्व किया।
कई अहम फैसलों में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
राजीव कुमार ने विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय कराने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने डिजिटल पेमेंट, बैंकिंग टेक्नोलॉजी, डिपॉजिट प्रोटेक्शन और वित्तीय स्थिरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधारों को आगे बढ़ाया। माना जाता है कि उनके कार्यकाल में सरकारी बैंकिंग व्यवस्था को अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए गए।
HDFC बैंक को क्या होगा फायदा?
राजीव कुमार का व्यापक अनुभव HDFC बैंक के कॉरपोरेट गवर्नेंस, नियामकीय अनुपालन और दीर्घकालिक रणनीति को और मजबूत करेगा। सार्वजनिक नीति और बैंकिंग सुधारों की गहरी समझ के कारण वे बैंक के विकास और भविष्य की योजनाओं को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके नेतृत्व से निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा भी और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
